junoon se umr kii taraf sarak raha hooñ aajkal | जुनूँ से उम्र की तरफ़ सरक रहा हूँ आजकल

  - Ananth Faani
जुनूँसेउम्रकीतरफ़सरकरहाहूँआजकल
क़दमबढ़ानेसेभीपहलेथकरहाहूँआजकल
घसीटलाओमुझकोघरसेऔरकामपरलगाओ
ज़राज़रासीबातपरभड़करहाहूँआजकल
क़फ़ससेसचमेंइश्क़हीहोरहाहोख़ुदा
समझआएइतनाक्यूँचहकरहाहूँआजकल
निशानायारख़ासहैनहींतुम्हाराइसलिए
तमामजिस्मदिलबनाधड़करहाहूँआजकल
दुकानजोचलानीहैसुख़नकीक्याकरूँँ'अनन्त'
ग़ज़लकानामदेकेकुछभीबकरहाहूँआजकल
  - Ananth Faani
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