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ABhishek Parashar
vo ladki umr men mujh se badi hai
vo ladki umr men mujh se badi hai | वो लड़की उम्र में मुझ से बड़ी है
- ABhishek Parashar
वो
लड़की
उम्र
में
मुझ
से
बड़ी
है
मुझे
जिस
सेे
मोहब्बत
हो
गई
है
बना
कर
दोस्त
रखना
चाहती
है
मगर
फिर
उसको
मुझ
सेे
प्यार
भी
है
सभी
हो
जाते
हैं
दीवाने
उसके
वो
लड़की
है
या
फिर
कोई
परी
है
उसे
जो
देखे
जो
जाए
उसी
का
ये
उसकी
आँखों
की
जादूगरी
है
नहीं
आता
मुझे
इज़हार
करना
सो
उस
सेे
दोस्ती
ही
हो
सकी
है
है
उसके
दिल
में
और
कोई
सो
उसको
त'अल्लुक
ख़त्म
करने
की
पड़ी
है
- ABhishek Parashar
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इज़हार
पे
भारी
है
ख़मोशी
का
तकल्लुम
हर्फ़ों
की
ज़बाँ
और
है
आँखों
की
ज़बाँ
और
Haneef akhgar
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दिल
पे
कुछ
और
गुज़रती
है
मगर
क्या
कीजे
लफ़्ज़
कुछ
और
ही
इज़हार
किए
जाते
हैं
Jaleel 'Aali'
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जो
कुछ
मता-ए-हुनर
हो
तो
सामने
लाओ
कि
ये
ज़माना-ए-इज़हार-ए-नस्ल-ओ-रंग
नहीं
Akbar Ali Khan Arshi Zadah
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इश्क़
हमारा
चाँद
सितारे
छू
लेगा
घुटनों
पर
आकर
इज़हार
किया
हमने
Darpan
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कीजे
इज़हार-ए-मोहब्बत
चाहे
जो
अंजाम
हो
ज़िंदगी
में
ज़िंदगी
जैसा
कोई
तो
काम
हो
Priyamvada ilhan
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बैठा
हूँ
अभी
सामने
और
सोच
रहा
हूँ
इज़हार
पे
मेरे
भला
क्या
मेरा
बनेगा
Afzal Ali Afzal
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अँगूठी
के
लिए
पैसा
नहीं
था
किया
इज़हार
हमने
शे'र
से
ही
Tanoj Dadhich
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चलो
करके
देखेंगे
इज़हार
अब
की
मुहब्बत
न
होगी
अदावत
तो
होगी
Tiwari Jitendra
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हाए!
इज़हार
करके
पछताए
उसको
इक
दोस्त
की
ज़रूरत
थी
Kumar Vikas
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उसको
चाहा
और
चाहत
पर
क़ायम
हैं
पर
अफ़सोस
के
हम
इज़हार
नहीं
कर
सकते
Shadab Asghar
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दोस्ती
लोग
कैसे
करते
हैं
आशिक़ी
लोग
कैसे
करते
हैं
तुम
बता
दो
मुझे
मोहब्बत
में
दिल-लगी
लोग
कैसे
करते
हैं
अपने
हाथों
से
अपनी
ही
बर्बाद
ज़िंदगी
लोग
कैसे
करते
हैं
रात
भर
जाग
कर
यही
सोचा
ख़ुद-कुशी
लोग
कैसे
करते
हैं
कोई
तो
अब
मुझे
सिखा
दो
ये
शा'इरी
लोग
कैसे
करते
हैं
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ABhishek Parashar
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जिन
आँखों
में
नींद
भी
आने
से
डरती
है
उन
आँखों
में
क्या
आएँगे
ख़्वाब
तुम्हारे
ABhishek Parashar
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ख़्वाब
को
कोई
हक़ीक़त
में
बदल
दे
मेरा
दिल
भी
अब
मसर्रत
चाहता
है
ABhishek Parashar
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किसी
का
प्यार
पाना
चाहता
हूँ
किसी
से
दिल
लगाना
चाहता
हूँ
ग़म-ए-दिल
को
भुला
कर
दोस्तों
अब
मैं
खुल
कर
मुस्कुराना
चाहता
हूँ
मोहब्बत
और
उलफ़त
से
किसी
को
मैं
भी
अपना
बनाना
चाहता
हूँ
मोहब्बत
से
किसी
पापा
की
प्यारी
परी
पे
हक़
जताना
चाहता
हूँ
मुझे
भी
प्यार
से
अब
देखे
कोई
मैं
अपने
ग़म
भुलाना
चाहता
हूँ
यक़ीं
कर
इस
दफ़ा
रिश्ता
किसी
से
मैं
भी
दिल
से
निभाना
चाहता
हूँ
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ABhishek Parashar
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महज़
तस्वीर
देख
लगता
है
जैसे
जाँ
तुम
क़रीब
बैठी
हो
ABhishek Parashar
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