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ABhishek Parashar
kisi ke paas aane se
kisi ke paas aane se | किसी के पास आने से
- ABhishek Parashar
किसी
के
पास
आने
से
किसी
के
दूर
जाने
से
मुझे
डर
लगता
है
अपना
किसी
को
अब
बनाने
से
लगाया
दिल
बहुत
लेकिन
नहीं
लगता
लगाने
से
कोई
तो
रोक
लो
उसको
मेरे
ख़्वाबों
में
आने
से
- ABhishek Parashar
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आ
जाए
कौन
कब
कहाँ
कैसी
ख़बर
के
साथ
अपने
ही
घर
में
बैठा
हुआ
हूँ
मैं
डर
के
साथ
Pratap Somvanshi
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शहर
गुम-सुम
रास्ते
सुनसान
घर
ख़ामोश
हैं
क्या
बला
उतरी
है
क्यूँँ
दीवार-ओ-दर
ख़ामोश
हैं
Azhar Naqvi
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मैं
कैसे
मान
लूँ
कि
इश्क़
बस
इक
बार
होता
है
तुझे
जितनी
दफ़ा
देखूँ
मुझे
हर
बार
होता
है
तुझे
पाने
की
हसरत
और
डर
ना-कामियाबी
का
इन्हीं
दो
तीन
बातों
से
ये
दिल
दो
चार
होता
है
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Bhaskar Shukla
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लिपट
जाते
हैं
वो
बिजली
के
डर
से
इलाही
ये
घटा
दो
दिन
तो
बरसे
Dagh Dehlvi
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कल
जहाँ
दीवार
थी
है
आज
इक
दर
देखिए
क्या
समाई
थी
भला
दीवाने
के
सर
देखिए
Javed Akhtar
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और
हुआ
भी
ठीक
वो
ही
जिसका
डर
था
बोझ
इतना
रख
दिया
था
बुलबुले
पर
Siddharth Saaz
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हम
किसी
दर
पे
न
ठिटके
न
कहीं
दस्तक
दी
सैकड़ों
दर
थे
मिरी
जाँ
तिरे
दर
से
पहले
Ibn E Insha
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मेरे
कमरे
में
उदासी
है
क़यामत
की
मगर
एक
तस्वीर
पुरानी
सी
हँसा
करती
है
Abbas Qamar
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गुज़ार
देते
हैं
रातें
पहलू
में
उसके
जुगनू
को
भी
दर
का
फ़क़ीर
बना
रखा
है
ALI ZUHRI
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मेरे
ही
संग-ओ-ख़िश्त
से
तामीर-ए-बाम-ओ-दर
मेरे
ही
घर
को
शहर
में
शामिल
कहा
न
जाए
Majrooh Sultanpuri
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उदासी
भी
मिली
है
और
ये
ग़म
भी
मिला
है
मोहब्बत
ने
मुझे
बर्बाद
करके
रख
दिया
है
भला
कैसे
करूँँ
अब
मैं
भरोसा
फिर
किसी
का
किसी
ने
मेरी
खा
खा
कर
क़सम
धोखा
दिया
है
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ABhishek Parashar
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मैं
तुम्हें
बोल
ही
नहीं
पाता
पर
मोहब्बत
मुझे
तुम्हीं
से
है
ABhishek Parashar
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मैं
उसे
सच
में
मोहब्बत
करता
हूँ
यारो
मगर
क्यूँँ
उसे
मेरी
मोहब्बत
इश्क़-बाज़ी
लगती
है
ABhishek Parashar
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कॉल
आया
था
मुझे
भी
इक
परी
का
जब
इरादा
कर
लिया
था
ख़ुद-कुशी
का
दिलरुबा
तुझ
से
बिछड़कर
सोचता
हूँ
यार
अब
मैं
क्या
करूँँ
इस
ज़िंदगी
का
मसअला
है
मुझको
मेरी
ज़िंदगी
से
और
कोई
हल
नहीं
इस
ज़िंदगी
का
एक
मैं
हूँ
उसका
होके
रह
गया
और
एक
वो
है
जो
हो
जाता
है
सभी
का
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ABhishek Parashar
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मेरा
महबूब
सच
में
बे-वफ़ा
है
या
उसको
मुझ
सेे
कोई
मसअला
है
ज़रा
सी
बात
पे
छोड़ा
था
मुझको
भला
ऐसे
भी
कोई
छोड़ता
है
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ABhishek Parashar
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