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ABhishek Parashar
ha
ha | हमें सब भूल जाना चाहिए था
- ABhishek Parashar
हमें
सब
भूल
जाना
चाहिए
था
दुबारा
दिल
लगाना
चाहिए
था
दुखा
था
दोस्त
जैसे
दिल
हमारा
हमें
उस
का
दुखाना
चाहिए
था
कि
उस
के
साथ
करके
बे-वफ़ाई
हमें
फिर
मुस्कुराना
चाहिए
था
मगर
अब
याद
आता
है
हमें
वो
हमें
जो
भूल
जाना
चाहिए
था
कि
क्या
ये
जान
कर
वो
बे-वफ़ा
थी
हमें
रिश्ता
निभाना
चाहिए
था
चली
जाती
हमें
फिर
छोड़
कर
वो
उसे
तो
बस
बहाना
चाहिए
था
ग़ज़ल
जो
बे-वफ़ाई
पर
लिखा
था
हमें
उसको
सुनाना
चाहिए
था
- ABhishek Parashar
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रात
हो,
चाँद
हो,
बारिश
भी
हो
और
तुम
भी
हो
ऐसा
मुमकिन
ही
नहीं
है
कि
कभी
हो
मिरे
साथ
Faiz Ahmad
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इस
से
पहले
कि
तुझे
और
सहारा
न
मिले
मैं
तिरे
साथ
हूँ
जब
तक
मिरे
जैसा
न
मिले
Afkar Alvi
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साथ
में
तू
मेरे
दो
गाम
तो
चल
सकता
है
इतना
चलने
से
मेरा
काम
तो
चल
सकता
है
तेरे
दिल
में
किसी
शायर
की
जगह
तो
होगी
इस
इलाके
में
मेरा
नाम
तो
चल
सकता
है
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Ashu Mishra
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बे-सबब
मुस्कुरा
रहा
है
चाँद
कोई
साज़िश
छुपा
रहा
है
चाँद
Gulzar
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राब्ता
लाख
सही
क़ाफ़िला-सालार
के
साथ
हम
को
चलना
है
मगर
वक़्त
की
रफ़्तार
के
साथ
Qateel Shifai
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तुम
अगर
साथ
देने
का
वा'दा
करो
मैं
यूँँही
मस्त
नग़्में
लुटाता
रहूँ
तुम
मुझे
देख
कर
मुस्कुराती
रहो
मैं
तुम्हें
देख
कर
गीत
गाता
रहूँ
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Sahir Ludhianvi
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निभाया
जिस
सेे
भी
रिश्ता
तो
फिर
हद
में
रहे
हैं
हम
किसी
के
मखमली
तकिए
के
ऊपर
सर
नहीं
रक्खा
Nirbhay Nishchhal
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ये
ज़ुल्फ़
अगर
खुल
के
बिखर
जाए
तो
अच्छा
इस
रात
की
तक़दीर
सँवर
जाए
तो
अच्छा
जिस
तरह
से
थोड़ी
सी
तेरे
साथ
कटी
है
बाक़ी
भी
उसी
तरह
गुज़र
जाए
तो
अच्छा
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Sahir Ludhianvi
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सगी
बहनों
का
जो
रिश्ता
रिश्ता
है
उर्दू
और
हिन्दी
में
कहीं
दुनिया
की
दो
ज़िंदा
ज़बानों
में
नहीं
मिलता
Munawwar Rana
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हमेशा
यही
भूल
करता
रहा
तेरा
साथ
पाने
को
मरता
रहा
सुनहरे
बहारों
के
मौसम
तले
गुलिस्ताँ
हमारा
बिखरता
रहा
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Ambar
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उसे
मुझ
सेे
मोहब्बत
है?
नहीं
तो
उसे
मेरी
ज़रूरत
है?
नहीं
तो
जिसे
मैं
चाँद
कहता
रहता
हूँ
दोस्त
वो
सच
में
ख़ूब-सूरत
है?
नहीं
तो
मुझे
उसकी
तलब
जैसे
लगी
है
उसे
भी
मेरी
आदत
है?
नहीं
तो
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ABhishek Parashar
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तेरी
क्यूँँ
मैंने
तिश्नगी
कर
ली
किस
लिए
ख़ुद
से
दिल-लगी
कर
ली
मैंने
इस
इश्क़
विश्क
में
पड़
कर
अपनी
बर्बाद
ज़िंदगी
कर
ली
ख़ुद-कुशी
कर
ली
तीरगी
ने
जब
बंद
कमरे
में
रौशनी
कर
ली
जब
मोहब्बत
नहीं
मिली
मुझको
तो
मोहब्बत
पे
शा'इरी
कर
ली
एक
दिन
अपनी
ज़िंदगी
से
दोस्त
हार
कर
मैंने
ख़ुद-कुशी
कर
ली
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ABhishek Parashar
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जहाँ
भर
में
कोई
तो
पूछे
इन
पापा
की
परियों
से
कि
लड़कों
के
दिलों
से
खेलना
किसने
सिखाया
है
ABhishek Parashar
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मियाँ
एक
भी
कुर्सी
ख़ाली
नहीं
है
मेरे
साथ
बैठी
है
तन्हाई
मेरी
ABhishek Parashar
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ख़ुद-कुशी
करने
में
हम
को
शर्म
आती
है
सो
हम
भी
अब
नशे
से
जिस्म
अपना
खोखला
कर
लेंगे
यारो
ABhishek Parashar
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