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RAAHI
ye qurbaani hamne uske naam likhi hai
ye qurbaani hamne uske naam likhi hai | ये कु़र्बानी हमने उसके नाम लिखी है
- RAAHI
ये
कु़र्बानी
हमने
उसके
नाम
लिखी
है
हसरत
तो
मेरी
पूरे
बाज़ार
बिकी
है
- RAAHI
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मंज़िल
पे
न
पहुँचे
उसे
रस्ता
नहीं
कहते
दो
चार
क़दम
चलने
को
चलना
नहीं
कहते
इक
हम
हैं
कि
ग़ैरों
को
भी
कह
देते
हैं
अपना
इक
तुम
हो
कि
अपनों
को
भी
अपना
नहीं
कहते
कम-हिम्मती
ख़तरा
है
समुंदर
के
सफ़र
में
तूफ़ान
को
हम
दोस्तो
ख़तरा
नहीं
कहते
बन
जाए
अगर
बात
तो
सब
कहते
हैं
क्या
क्या
और
बात
बिगड़
जाए
तो
क्या
क्या
नहीं
कहते
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Nawaz Deobandi
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हसरत
भरी
नज़र
से
तुझे
देखता
हूँ
मैं
जिसको
ये
खल
रहा
है
वो
आँखों
को
फोड़
ले
Shajar Abbas
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दु'आ
में
माँग
लूँ
मैं
उसको
लेकिन
फ़क़त
पाना
मेरा
मक़सद
नहीं
है
Shadab Asghar
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कुछ
नज़र
आता
नहीं
उस
के
तसव्वुर
के
सिवा
हसरत-ए-दीदार
ने
आँखों
को
अंधा
कर
दिया
Haidar Ali Aatish
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कटते
भी
चलो,
बढ़ते
भी
चलो,
बाज़ू
भी
बहुत
हैं,
सर
भी
बहुत
चलते
भी
चलो
कि
अब
डेरे
मंज़िल
ही
पे
डाले
जाएँगे
Faiz Ahmad Faiz
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तलाश
रात
गए
रोकनी
पड़ीं
उनको
के
लाश
फेंक
दी
हमने
वहीं
कहीं
अपनी
Aakash Giri
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प्यार
में
कैसी
थकन
कह
के
ये
घर
से
निकली
कृष्ण
की
खोज
में
वृषभानु-लली
मीलों
तक
Kunwar Bechain
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'फ़ैज़'
थी
राह
सर-ब-सर
मंज़िल
हम
जहाँ
पहुँचे
कामयाब
आए
Faiz Ahmad Faiz
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हमीं
तलाश
के
देते
हैं
रास्ता
सब
को
हमीं
को
बा'द
में
रस्ता
दिखाया
जाता
है
Varun Anand
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तेरी
तस्वीर
अगर
बनाते
हम
तेरे
बारे
में
क्या
बताते
हम
ढूँढ़ना
है
उसे
अंधेरे
में
और
दिया
भी
नहीं
बनाते
हम
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Tajdeed Qaiser
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किताब
है
ज़िंदगी
मैं
पन्ना
यहाँ
नया
लेने
आ
गया
हूँ
सफ़र
का
राही
मैं
आपसे
एक
तज़रुबा
लेने
आ
गया
हूँ
RAAHI
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ज़िंदगी
खेल
शतरंज
का
है
हार
कर
चाल
मैं
शख़्स
जीता
RAAHI
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आप
मेरी
ग़ज़ल
सुनने
आए
हैं
ना
आइए
बैठिए
तालियाँ
दीजिए
RAAHI
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जश्न
मैं
मौत
का
मनाता
हूँ
मैं
तो
मर
कर
भी
गीत
गाता
हूँ
जल्दबाज़ी
बहुत
रही
होगी,
हाँ
पुरानी
ग़ज़ल
सुनाता
हूँ
जान
करती
रही
मुझे
वा'दा,
मैं
कभी
भी
नहीं
निभाता
हूँ
डगमगाता
नहीं
कभी
सच
से,
मैं
न
ग़लती
कभी
छुपाता
हूँ
आख़िरी
मुशायरे
में
हूँ
झूठ
तो
मैं
नहीं
बताता
हूँ
भर
रहा
दिल
मिरा,
ग़लत
जो
हूँ,
आँख
नम
है,
मगर
हँसाता
हूँ
सोचता
जो
कभी
ख़ुदास
थे
आज
उनको
बहुत
रुलाता
हूँ
ये
अजब
लोग
और
ये
क़िस्से
याद
है
,
हाँ
मगर
भुलाता
हूँ
चाह
कोई
नहीं
मिले
मुझ
सेे
मिल
के
सब
सेे
जो
रूठ
जाता
हूँ
बात
मंज़िल
की
हो
जहाँ
पर
भी
खु़द
को
'राही'
वहाँ
बताता
हूँ
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RAAHI
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प्यार
में
चाहते
रंग
गोरा
सभी
जिस्म
होना
ये
काला
ग़लत
हो
गया
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