jashn main maut ka manaata hooñ | जश्न मैं मौत का मनाता हूँ

  - RAAHI
जश्नमैंमौतकामनाताहूँ
मैंतोमरकरभीगीतगाताहूँ
जल्दबाज़ीबहुतरहीहोगी,
हाँपुरानीग़ज़लसुनाताहूँ
जानकरतीरहीमुझेवा'दा,
मैंकभीभीनहींनिभाताहूँ
डगमगातानहींकभीसचसे,
मैंग़लतीकभीछुपाताहूँ
आख़िरीमुशायरेमेंहूँ
झूठतोमैंनहींबताताहूँ
भररहादिलमिरा,ग़लतजोहूँ,
आँखनमहै,मगरहँसाताहूँ
सोचताजोकभीख़ुदासथे
आजउनकोबहुतरुलाताहूँ
येअजबलोगऔरयेक़िस्से
यादहै,हाँमगरभुलाताहूँ
चाहकोईनहींमिलेमुझसेे
मिलकेसबसेेजोरूठजाताहूँ
बातमंज़िलकीहोजहाँपरभी
खु़दको'राही'वहाँबताताहूँ
  - RAAHI
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