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Tehzeeb Hafi
uske chaahne waalon ka aaj uski gali men dharna hai
uske chaahne waalon ka aaj uski gali men dharna hai | उसके चाहने वालों का आज उसकी गली में धरना है
- Tehzeeb Hafi
उसके
चाहने
वालों
का
आज
उसकी
गली
में
धरना
है
यहीं
पे
रुक
जाओ
तो
ठीक
है
आगे
जाके
मरना
है
रूह
किसी
को
सौंप
आए
हो
तो
ये
जिस्म
भी
ले
जाओ
वैसे
भी
मैंने
इस
ख़ाली
बोतल
का
क्या
करना
है
आँख
से
आँसू
दिल
से
दर्द
उमड़
आने
पर
हैरत
क्या
मुझे
पता
था
उसने
हर
बर्तन
का
नूतन
भरना
है
- Tehzeeb Hafi
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बोसा-ए-रुख़्सार
पर
तकरार
रहने
दीजिए
लीजिए
या
दीजिए
इंकार
रहने
दीजिए
Hafeez Jaunpuri
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मोहब्बत
कर
मोहब्बत
कर
यही
बस
कह
रहा
है
दिल
सुन
अपने
दिल
की
तू
ये
ग़ैर
की
आवाज़
थोड़ी
है
Krishnakant Kabk
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मोहब्बत
से
हमें
इनकार
कब
है
मगर
वो
सैलरी
भी
पूछते
हैं
Gagan Bajad 'Aafat'
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करने
को
कुछ
नहीं
है
नए
साल
में
'यशब'
क्यूँ
न
किसी
से
तर्क-ए-मोहब्बत
ही
कीजिए
Yashab Tamanna
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वरना
बे-मौत
ही
मर
जाएँगे
सारे
किरदार
एक
इनकार
ज़रूरी
है
कहानी
के
लिए
Madan Mohan Danish
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मुझे
रोना
नहीं
आवाज़
भी
भारी
नहीं
करनी
मोहब्बत
की
कहानी
में
अदाकारी
नहीं
करनी
Afzal Khan
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ग़ुर्बत
की
ठंडी
छाँव
में
याद
आई
उस
की
धूप
क़द्र-ए-वतन
हुई
हमें
तर्क-ए-वतन
के
बाद
Kaifi Azmi
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अपना
हर
तिनका
समेटे
किस
जगह
पर
जा
छुपे
हम
तिरी
आवाज़
की
चिड़ियों
से
घबराते
हुए
Swapnil Tiwari
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तेरी
आवाज़
को
इस
शहर
की
लहरें
तरसती
हैं
ग़लत
नंबर
मिलाता
हूँ
तो
पहरों
बात
होती
है
Ghulam Mohammad Qasir
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जब
उसने
पलट
कर
नहीं
देखा
तो
ये
जाना
आवाज़
लगाने
में
भी
नुक़सान
बहुत
है
Imtiyaz Khan
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तुमने
तो
बस
दिया
जलाना
होता
है
हमने
कितनी
दूर
से
आना
होता
है
आँसू
और
दु'आ
में
कोई
फ़र्क
नहीं
रो
देना
भी
हाथ
उठाना
होता
है
मेरे
साथ
परिन्दे
कुछ
इंसान
भी
हैं
मैंने
अपने
घर
भी
जाना
होता
है
तुम
अब
उन
रस्तों
पर
हो
तहज़ीब
जहाँ
मुड़कर
तकने
पर
जुर्माना
होता
है
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Tehzeeb Hafi
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मैं
उस
से
ये
तो
नहीं
कह
रहा
जुदा
न
करे
मगर
वो
कर
नहीं
सकता
तो
फिर
कहा
न
करे
वो
जैसे
छोड़
गया
था
मुझे
उसे
भी
कभी
ख़ुदा
करे
कि
कोई
छोड़
दे
ख़ुदा
न
करे
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Tehzeeb Hafi
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शैतान
के
दिल
पर
चलता
हूँ
सीनों
में
सफ़र
करता
हूँ
उस
आँख
का
क्या
बचता
है
मैं
जिस
आँख
में
घर
करता
हूँ
जो
मुझ
में
उतरे
हैं
उनको
मेरी
लहरों
का
अंदाजा
है
दरियाओ
में
उठता
बैठता
हूँ
सैलाब
बसर
करता
हूँ
मेरी
तन्हाई
का
बोझ
तुम्हारी
बिनाई
ले
डूबेगा
मुझे
इतना
क़रीब
से
मत
देखो
आँखों
पर
असर
करता
हूँ
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Tehzeeb Hafi
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मुझको
दरवाजे
पर
ही
रोक
लिया
जाता
है
मेरे
आने
से
भला
आप
का
क्या
जाता
है
तुम
अगर
जाने
लगे
हो
तो
पलट
कर
मत
देखो
मौत
लिखकर
तो
क़लम
तोड़
दिया
जाता
है
तुझको
बतलाता
मगर
शर्म
बहुत
आती
है
तेरी
तस्वीर
से
जो
काम
लिया
जाता
है
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Tehzeeb Hafi
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सहरा
से
हो
के
बाग़
में
आया
हूँ
सैर
को
हाथों
में
फूल
हैं
मेरे
पाँव
में
रेत
है
Tehzeeb Hafi
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