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Tarique Jamal
log dono ka dukh samajh paa.e
log dono ka dukh samajh paa.e | लोग दोनों का दुख समझ पाएँ
- Tarique Jamal
लोग
दोनों
का
दुख
समझ
पाएँ
रोइए
आप
थोड़ा
मेरे
लिए
- Tarique Jamal
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हम
कुछ
ऐसे
उसके
आगे
अपनी
वफ़ा
रख
देते
हैं
बच्चे
जैसे
रेल
की
पटरी
पर
सिक्का
रख
देते
हैं
तस्वीर-ए-ग़म,
दिल
के
आँसू,
रंजो-नदामत,
तन्हाई
उसको
ख़त
लिखते
हैं
ख़त
में
हम
क्या
क्या
रख
देते
हैं
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Subhan Asad
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मुझ
ऐसा
शख़्स
अगर
क़हक़हों
से
भर
जाए
ये
साँस
लेती
उदासी
तो
घुट
के
मर
जाए
वो
मेरे
बाद
तरस
जाएगा
मोहब्बत
को
उसे
ये
कहना
अगर
हो
सके
तो
मर
जाए
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Rakib Mukhtar
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शहर
का
तब्दील
होना
शाद
रहना
और
उदास
रौनक़ें
जितनी
यहाँ
हैं
औरतों
के
दम
से
हैं
Muneer Niyazi
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कोई
हादसा
लेकर
आदमी
किधर
जाए
आदमी
अगर
कह
दे
हादसा
उदासी
है
Rohit tewatia 'Ishq'
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ख़ून
से
जोड़ा
हुआ
हर
ईंट
ढेला
हो
गया
दो
तरफ़
चूल्हे
जले
औ'
घर
अकेला
हो
गया
Dhiraj Singh 'Tahammul'
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ख़ुदा
को
मान
कि
तुझ
लब
के
चूमने
के
सिवा
कोई
इलाज
नहीं
आज
की
उदासी
का
Zafar Iqbal
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रास
आ
जाएगा
इक
रोज़
तेरा
जाना
भी
हम
किसी
दुख
में
लगातार
नहीं
रोते
हैं
Inaam Azmi
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मेरे
नादाँ
दिल
उदासी
कोई
अच्छी
शय
नहीं
देख
सूखे
फूल
पर
आती
नहीं
हैं
तितलियाँ
Deepak Vikal
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जो
सावन
होते
सूखा,
उस
फूल
पे
लानत
हो
मुझ
पे
लानत,
तेरे
होते,
यार
उदासी
है
Siddharth Saaz
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जिसे
जो
जी
में
आता
है
सो
लिखता
है
बड़ा
मुश्किल
है
कह
पाना
क़लम
का
दुख
Harsh saxena
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फील
तुम
भी
करो
हमारा
दुख
कोइ
इग्नोर
इस
तरह
से
करे
Tarique Jamal
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मौत
को
याद
कर
लिया
जाए
ज़िंदगी-ज़िंदगी
नहीं
करते
Tarique Jamal
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एक
खिड़की
जो
खुल
नहीं
सकती
एक
लड़का
जो
इंतज़ार
में
है
Tarique Jamal
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होके
बीमार
से
निकलते
हैं
दिल
के
बाज़ार
से
निकलते
हैं
मेरा
दुख
जानते
हैं
अच्छे
से
अश्क
दीवार
से
निकलते
हैं
जो
कभी
लौट
कर
नहीं
आते
वो
बड़े
प्यार
से
निकलते
हैं
लोग
जाते
हैं
छोड़
कर
दुनिया
यानी
किरदार
से
निकलते
हैं
जो
सुखन
से
इलाज
करते
हैं
तेरे
दरबार
से
निकलते
हैं
उसकी
पाकीज़गी
पे
शक
न
करें
फूल
जो
खार
से
निकलते
हैं
टूटा
दिल
अपना
लेके
हाथों
में
कूचा-ए-यार
से
निकलते
हैं
आता
है
इक
हुजूम
देखने
को
हम
भी
जब
कार
से
निकलते
हैं
तेरी
गलियों
में
घूमते
लड़के
तेरी
दरकार
से
निकलते
हैं
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Tarique Jamal
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मेरा
दुख
जानते
हैं
अच्छे
से
अश्क
दीवार
से
निकलते
हैं
Tarique Jamal
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