kyuuñ tere dar se hi chup chaap guzar aate hain | क्यूँ तेरे दर से ही चुप चाप गुज़र आते हैं

  - Tajdeed Qaiser
क्यूँतेरेदरसेहीचुपचापगुज़रआतेहैं
जोख़ुदाओंकीतरहबनकेशररआतेहैं
वोमेराहोकेभीहोसकतानहींहैरतहै
फिरभीहरहालमेंहमसाथनज़रआतेहैं
वक़्तहैदोस्तइसेध्यानमेंरखकाममेंला
ख़्वाबवीरानजज़ीरोंपेउतरआतेहैं
उसकेवहदतनेमुझेअपनीतरफ़खींचाथा
वरनारस्तेमेंतोकितनेहीशजरआतेहैं
हरकोईचाँदसाचेहरानहींहोतासच्चा
आबशारोंकीतहोंमेंभीखंडरआतेहैं
मैंकिहैरानहूँइसरब्तपेहमदोनोंके
लेकेहरबारअदूतेरीख़बरआतेहैं
  - Tajdeed Qaiser
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