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Tajdeed Qaiser
jo teri baanhon men hansati rahi hai kheli hai
jo teri baanhon men hansati rahi hai kheli hai | जो तेरी बाँहों में हँसती रही है खेली है
- Tajdeed Qaiser
जो
तेरी
बाँहों
में
हँसती
रही
है
खेली
है
वो
लड़की
राज़
नहीं
है
कोई
पहेली
है
हाँ
मेरा
हाथ
पकड़कर
झटक
दिया
उसने
सहारा
दे
के
बताया
कि
तू
अकेली
है
यहाँ
पे
ख़ाक
बसेरा
करेगा
कोई
शख़्स
हमारी
रूह
गिराई
हुई
हवेली
है
है
पहले
दिन
से
दरख़्तों
की
छतरियाँ
मेरे
साथ
और
इब्तिदास
ये
बारिश
मेरी
सहेली
है
- Tajdeed Qaiser
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न
जाने
कैसी
महक
आ
रही
है
बस्ती
से
वही
जो
दूध
उबलने
के
बाद
आती
है
Munawwar Rana
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सुखाई
जा
रही
है
जुल्फ़
धोकर
घटा
या'नी
निचोड़ी
जा
रही
है
Satya Prakash Soni
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'अंजुम'
तुम्हारा
शहर
जिधर
है
उसी
तरफ़
इक
रेल
जा
रही
थी
कि
तुम
याद
आ
गए
Anjum Rehbar
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अब
उसकी
शादी
का
क़िस्सा
न
छेड़ो
बस
इतना
कह
दो
कैसी
लग
रही
थी
Zubair Ali Tabish
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उसे
पागल
बनाती
फिर
रही
हो
जिसे
शौहर
बनाना
चाहिए
था
Arvind Inaayat
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बंद
कमरा,
सर
पे
पंखा,
तीरगी
है
और
मैं
एक
लड़ाई
चल
रही
है
ज़िंदगी
है
औऱ
मैं
Shadab Asghar
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मुझे
एक
लाश
कहकर
न
बहाओ
पानियों
में
मेरा
हाथ
छू
के
देखो
मेरी
नब्ज़
चल
रही
है
Azm Shakri
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मेरे
होंठों
के
सब्र
से
पूछो
उसके
हाथों
से
गाल
तक
का
सफ़र
Mehshar Afridi
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आज
भी
शायद
कोई
फूलों
का
तोहफ़ा
भेज
दे
तितलियाँ
मंडला
रही
हैं
काँच
के
गुल-दान
पर
Shakeb Jalali
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किसी
को
घर
से
निकलते
ही
मिल
गई
मंज़िल
कोई
हमारी
तरह
उम्र
भर
सफ़र
में
रहा
Ahmad Faraz
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ख़्वाब
आरास्ता
करे
कोई
रात
को
ख़ुशनुमा
करे
कोई
देख
ले
ख़ुद
को
बहते
पानी
में
धूप
को
आईना
करे
कोई
रोज़
ग़ैरों
से
मिलने
आता
है
हम
सेे
भी
मिल
लिया
करे
कोई
तेरी
दुनिया
में
दिल
नहीं
लगता
तेरी
दुनिया
में
क्या
करे
कोई
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Tajdeed Qaiser
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आज
सूरज
ग़ुरूब
होने
तक
छोड़
आना
उसे
बिछौने
तक
देखना
नींद
उसको
आ
जाए
जागते
रहना
उसके
सोने
तक
अपने
पैरों
के
बल
खड़ी
हूँ
मैं
हाथ
जाता
नहीं
खिलौने
तक
फूल
है
तू
मैं
पत्ती
पत्ती
हूँ
तेरा
होना
है
मेरे
होने
तक
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Tajdeed Qaiser
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हँसने
रोने
वाले
अच्छे
लगते
हैं
छोटे
छोटे
जज़्बे
अच्छे
लगते
हैं
चाँदी
जैसी
धूप
में
तार
पे
टँगे
हुए
रंग
बिरंगे
कपड़े
अच्छे
लगते
हैं
जिस
बरगद
के
नीचे
गौतम
बैठा
हो
उस
बरगद
के
साए
अच्छे
लगते
हैं
शहरस
दूर
इक
छोटी
सी
बस्ती
वाले
वो
जिनको
बल-बूटे
अच्छे
लगते
हैं
कॉफ़ी
शॉप
की
बाहर
वाली
टेबल
पर
दोनों
साथ
में
बैठे
अच्छे
लगते
हैं
घूम
घुमाकर
सारी
दुनिया
में
'तजदीद'
वापिस
अपने
रस्ते
अच्छे
लगते
हैं
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Tajdeed Qaiser
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सोचती
है
कभी
कभी
दुनिया
रब
पुराना
है
और
नई
दुनिया
मुझको
फिर
से
हसीन
लगने
लगी
उसने
इस
तरह
पेश
की
दुनिया
जब
तलक
तेरे
ख़्वाब
आते
रहे
ख़ूब-सूरत
बड़ी
लगी
दुनिया
तेरे
हाथों
से
छू
लिया
महताब
तेरी
आँखों
से
देख
ली
दुनिया
मुझको
अपनी
समझ
नहीं
आती
और
ऊपर
से
ये
तेरी
दुनिया
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Tajdeed Qaiser
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मुझको
फिर
से
हसीन
लगने
लगी
उसने
इस
तरह
पेश
की
दुनिया
मुझको
अपनी
समझ
नहीं
आती
और
ऊपर
से
ये
तेरी
दुनिया
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Tajdeed Qaiser
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