khalish-e-zakhm-e-tamanna ka mudaava bhi na tha | ख़लिश-ए-ज़ख़्म-ए-तमन्ना का मुदावा भी न था

  - Tahir Tilhari
ख़लिश-ए-ज़ख़्म-ए-तमन्नाकामुदावाभीथा
मैंनेवोचाहाजोतक़दीरमेंलिक्खाभीथा
इतनायादआएगाइकरोज़येसोचाभीथा
हाएवोशख़्सकिजिससेकोईरिश्ताभीथा
क्यूँउसेदेखकेबढ़तीथीमिरीतिश्ना-लबी
अब्र-पाराभीथावोकोईदरियाभीथा
दिलवोसहराकिजहाँउड़तीथीहालातकीगर्द
ग़मवोबादलजोकभीखुलकेबरसताभीथा
तूनेक्यूँजागतेरहनेकीसज़ादीमुझको
तेरेबारेमेंकोईख़्वाबतोदेखाभीथा
होगएलोगयेक्यूँमेरेलहूकेप्यासे
मैंनेतोआँखउठाकरउसेदेखाभीथा
कुछझिझकतीहुईनज़रेंभीथींमहव-ए-गुल-गश्त
मैंचमन-ज़ार-ए-तसव्वुरमेंअकेलाभीथा
बाज़रातोंमेंयेमंज़रभीनज़रसेगुज़रा
शम्अ'भीजलतीरहीघरमेंउजालाभीथा
कभीबनजाएगीयूँँयादतिरीजुज़्व-ए-हयात
मैंनेइसरुख़सेतिरेबाबमेंसोचाभीथा
आसमाँऔरज़मींहद्द-ए-नज़रतकथेमुहीत
हमकहाँजातेनिकलकरकोईरस्ताभीथा
कुछउमीदेंथींउमंगेंथींतमन्नाएँथीं
दिलतिरीराहमेंनिकलातोअकेलाभीथा
उम्रभरकरतेरहेघरकीतमन्ना'ताहिर'
औरतक़दीरमेंदीवारकासायाभीथा
  - Tahir Tilhari
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