jo ham kahein vahii tarz-e-bayaan rakhta hai | जो हम कहें वही तर्ज़-ए-बयान रखता है

  - Tahir Tilhari
जोहमकहेंवहीतर्ज़-ए-बयानरखताहै
वोअपनेमुँहमेंहमारीज़बानरखताहै
रसाईता-ब-सर-ए-ला-मकानरखताहै
परिंद-ए-फ़िक्रग़ज़बकीउड़ानरखताहै
सुनाहैपाँवतलेआसमानरखताहै
फ़क़ीर-ए-शहरबड़ीआन-बानरखताहै
वोजिसकोसाया-ए-दीवारतकनसीबनहीं
जानेज़ेहनमेंकितनेमकानरखताहै
बहुतबलीग़हैअंदाज़-ए-गुफ़्तुगूउसका
हरएकलफ़्ज़मेंइकदास्तानरखताहै
कोईदेखसकेउसकेघरकीहालत-ए-ज़ार
वोशायदइसलिएऊँचामकानरखताहै
वोसबसेमिलताहैहँसकरबड़ेख़ुलूसकेसाथ
अनाकीतेग़मगरदरमियानरखताहै
हमारेशहरकीआग़ोशवाहैसबकेलिए
बड़ीकुशादा-दिलीमेज़बानरखताहै
हमेंतोगाँवकीआसूदगीनेलूटलिया
जहाँफ़क़ीरभीअपनामकानरखताहै
उसीकेसरपेकोईसाएबाँनहीं'ताहिर'
जोख़ुदकोसबकेलिएसाएबानरखताहै
  - Tahir Tilhari
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