mausamon ke shahar men paani ke ghar ugne lage | मौसमों के शहर में पानी के घर उगने लगे

  - Tahir Hanfi
मौसमोंकेशहरमेंपानीकेघरउगनेलगे
चुपहवाकीकोखसेतन्हासफ़रउगनेलगे
हाथकीरेखाओंमेंसाकितहुएमा'नी-ओ-हर्फ़
उँगलियोंकीपोरपेख़ूँकेशजरउगनेलगे
ख़्वाहिशोंकीआगमेंजलताबदनतपतालहू
सोचतेजिस्मोंकीशाख़ोंपरहुनरउगनेलगे
मेरीमिट्टीनेमुझेपहचानबख़्शीथीमगर
आँखकीपुतलीमेंउजड़ेख़्वाबघरउगनेलगे
ज़िंदगीकीदौड़में'ताहिर'अकेलातोनहीं
वक़्तकीरफ़्तारमेंज़ख़्मोंकेपरउगनेलगे
  - Tahir Hanfi
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