gham is ka kuchh nahin hai ki main kaam aa gaya | ग़म इस का कुछ नहीं है कि मैं काम आ गया

  - Tahir Faraz
ग़मइसकाकुछनहींहैकिमैंकामगया
ग़मयेहैक़ातिलोंमेंतिरानामगया
जुगनूजलेबुझेमिरीपलकोंपेसुब्हतक
जबभीतिराख़यालसर-ए-शामगया
महसूसकररहाहूँमैंख़ुशबूकीबाज़गश्त
शायदतिरेलबोंपेमिरानामगया
कुछदोस्तोंनेपूछाबताओग़ज़लहैक्या
बे-साख़्तालबोंपेतिरानामगया
मैंनेतोएकलाशकीदीथीख़बर'फ़राज़'
उल्टामुझीपेक़त्लकाइल्ज़ामगया
  - Tahir Faraz
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