1 | 1

  - Tabassum Zia
1
कल्लनकीख़ुद-कलामी
मैंब्याहरचाऊँगी
कुछरूपएहोजाएँ
मैंकचराअच्छीतरहसाफ़करसकतीहूँ
बर्तनमांजलेतीहूँ
झाड़नभीचलालेतीहूँ
मुझेखानाबहुतअच्छापकानाआताहै
मैंकोठियोंमेंकामकरूँँगी
कुछरूपएहोजाएँतोअपनाब्याहरचाऊँगी
2
कल्लनपोछालगातीहैतोपिंडलियाँनंगीहोजातीहैं
कभीचाकसँभालतीहैतोदुपट्टागिरजाताहै
सीढ़ियाँउतरनेमेंख़ूबएहतियातकरतीहैमगरछातियाँतोछलकतीहैं
पोछालगानेमेंख़ूबज़ोरलगताहैलेकिनकूल्हेहैंकिभारीहोतेजातेहैं
3
(कल्लनकाअपनेबिखरेहुएबालोंसेकलाम
येकॉकरोचगंदगीकोक्यूँँपसंदकरतेहैं
मैंनेउसेरोकनेकेबहुतजतनकिए
मगरवोनालीमेंउतरगया
औरकुछदेरबा'दमुझसेदूरबैठकरअपनेहास्सेचाटनेलगा
4
अबकल्लनदाजख़ूबबनासकतीहै
लेकिनउसेसुहागरातकाइंतिज़ारनहीं
  - Tabassum Zia
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy

Good night Shayari

Our suggestion based on your choice

Similar Writers

our suggestion based on Tabassum Zia

Similar Moods

As you were reading Good night Shayari Shayari