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Surendra Karkash
daur ye pahli nazar ke pyaar ka hai
daur ye pahli nazar ke pyaar ka hai | दौर ये पहली नज़र के प्यार का है
- Surendra Karkash
दौर
ये
पहली
नज़र
के
प्यार
का
है
सब
यहाँ
चेहरा
सजाने
में
लगे
हैं
बाँटता
हैं
ग़म
यहाँ
पे
कौन
किसका
यार
बस
दारू
पिलाने
में
लगे
हैं
- Surendra Karkash
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वो
जो
पहला
था
अपना
इश्क़
वही
आख़िरी
वारदात
थी
दिल
की
Pooja Bhatia
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ख़ुद-कुशी
जुर्म
भी
है
सब्र
की
तौहीन
भी
है
इस
लिए
इश्क़
में
मर
मर
के
जिया
जाता
है
Ibrat Siddiqui
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दौलतें
मुद्दा
बनीं
या
ज़ात
आड़े
आ
गई
इश्क़
में
कोई
न
कोई
बात
आड़े
आ
गई
Baghi Vikas
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हर
किसी
से
ही
मुहब्बत
माँगता
है
दिल
तो
अब
सब
सेे
अक़ीदत
माँगता
है
सीख
आया
है
सलीक़ा
ग़ुफ़्तगू
का
मुझ
सेे
मेरा
दोस्त
इज़्ज़त
माँगता
है
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दिल
में
जो
मोहब्बत
की
रौशनी
नहीं
होती
इतनी
ख़ूब-सूरत
ये
ज़िंदगी
नहीं
होती
Hastimal Hasti
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पलट
कर
लौट
आने
में
मज़ा
भी
है
मुहब्बत
भी
बुलाकर
देख
लो
शायद
पलट
कर
लौट
आएँ
हम
Gaurav Singh
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इश्क़
के
इज़हार
में
हर-चंद
रुस्वाई
तो
है
पर
करूँँ
क्या
अब
तबीअत
आप
पर
आई
तो
है
Akbar Allahabadi
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ज़रूरत
सब
कराती
है
मोहब्बत
भी
इबादत
भी
नहीं
तो
कौन
बेमतलब
किसी
को
याद
करता
है
Umesh Maurya
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बहुत
आसान
है
कहना,
बुरा
क्या
है
भला
क्या
है
करोगे
इश्क़
तब
मालूम
होगा,
मसअला
क्या
है
Bhaskar Shukla
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किसी
भी
शख़्स
के
झूठे
दिलासे
में
नहीं
आती
कहानी
हो
अगर
लंबी
तराशे
में
नहीं
आती
जहाँ
में
अब
कहाँ
कोई
जो
मजनूँ
की
तरह
चाहे
मोहब्बत
इसलिए
भी
अब
तमाशे
में
नहीं
आती
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Ansar Ethvi
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ये
दवा
आज
आज़माने
दे
जाम
ला
उसकी
याद
आने
दे
अंजुमन
में
तिरी
सभी
दाना
इक
मुझे
भी
ग़ज़ल
सुनाने
दे
काम
उसका
चलो
करें
आसाँ
जा
रहा
है
ख़ुशी
से
जाने
दे
बात
बुत
से
ग़ज़ल
नहीं
होती
क़ाफ़िया
भी
ज़रा
मिलाने
दे
होश
वाले
अलग
नशे
में
हैं
दोस्त
मय
पीने
दे
पिलाने
दे
दिन
है
मसरूफ़
और
शब
तन्हा
शाम
तो
ख़ुशनुमा
बनाने
दे
रोज़
की
बात
है
ग़म-ए-दुनिया
छोड़
भी
गीत
गुनगुनाने
दे
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Surendra Karkash
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शा'इरी
से
इंक़िलाब
आए
तो
कैसे
सुन
के
सब
ताली
बजाने
में
लगे
हैं
शे'र
‘कर्कश’
कौन
महफ़िल
में
सुनेगा
लोग
सारे
नाच
गाने
में
लगे
हैं
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Surendra Karkash
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डिस्को
पसंद
सबको
तो
शेर-ओ-सुखन
हमें
अब
महफ़िलों
में
अपनी
वो
जादूगरी
गई
हैं
फैज़
ग़म
जवानी
में
जुज़
इश्क़
और
भी
या
नौकरी
मिली
नहीं
या
नौकरी
गई
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Surendra Karkash
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