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Surendra Karkash
ye davaa aaj aazmaane de
ye davaa aaj aazmaane de | ये दवा आज आज़माने दे
- Surendra Karkash
ये
दवा
आज
आज़माने
दे
जाम
ला
उसकी
याद
आने
दे
अंजुमन
में
तिरी
सभी
दाना
इक
मुझे
भी
ग़ज़ल
सुनाने
दे
काम
उसका
चलो
करें
आसाँ
जा
रहा
है
ख़ुशी
से
जाने
दे
बात
बुत
से
ग़ज़ल
नहीं
होती
क़ाफ़िया
भी
ज़रा
मिलाने
दे
होश
वाले
अलग
नशे
में
हैं
दोस्त
मय
पीने
दे
पिलाने
दे
दिन
है
मसरूफ़
और
शब
तन्हा
शाम
तो
ख़ुशनुमा
बनाने
दे
रोज़
की
बात
है
ग़म-ए-दुनिया
छोड़
भी
गीत
गुनगुनाने
दे
- Surendra Karkash
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प्रेम
की
गली
में
सब
शराब
लेकर
आए
थे
हम
बहुत
ख़राब
थे
किताब
लेकर
आए
थे
Aman Akshar
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वो
गर
शराब
है
तो
समझो
कि
मैं
नशा
हूँ
कुछ
इस
तरह
से
भीतर
उस
शख़्स
के
बसा
हूँ
Harsh saxena
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खद्दर
पहन
के
बेच
रहा
था
शराब
वो
देखा
मुझे
तो
हाथ
में
झंडा
उठा
लिया
मैं
भी
कोई
गँवार
सिपाही
न
था
जनाब
मैंने
भी
जाम
फेंक
के
डंडा
उठा
लिया
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Paplu Lucknawi
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मुझे
ये
फ़िक्र
सब
की
प्यास
अपनी
प्यास
है
साक़ी
तुझे
ये
ज़िद
कि
ख़ाली
है
मिरा
पैमाना
बरसों
से
Majrooh Sultanpuri
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कुछ
भी
बचा
न
कहने
को
हर
बात
हो
गई
आओ
कहीं
शराब
पिएँ
रात
हो
गई
Nida Fazli
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ग़ुरूर-ए-लुत्फ़-ए-साक़ी
नश्शा-ए-बे-बाकी-ए-मस्ताँ
नम-ए-दामान-ए-इस्याँ
है
तरावत
मौज-ए-कौसर
की
Mirza Ghalib
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गरेबाँ
चाक,
धुआँ,
जाम,
हाथ
में
सिगरेट
शब-ए-फ़िराक़,
अजब
हाल
में
पड़ा
हुआ
हूँ
Hashim Raza Jalalpuri
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मैं
नज़र
से
पी
रहा
था
तो
ये
दिल
ने
बद-दुआ
दी
तिरा
हाथ
ज़िंदगी
भर
कभी
जाम
तक
न
पहुँचे
Shakeel Badayuni
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फ़रेब-ए-साक़ी-ए-महफ़िल
न
पूछिए
'मजरूह'
शराब
एक
है
बदले
हुए
हैं
पैमाने
Majrooh Sultanpuri
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ये
मय-कदा
है
यहाँ
हैं
गुनाह
जाम-ब-दस्त
वो
मदरसा
है
वो
मस्जिद
वहाँ
मिलेगा
सवाब
Ali Sardar Jafri
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शा'इरी
से
इंक़िलाब
आए
तो
कैसे
सुन
के
सब
ताली
बजाने
में
लगे
हैं
शे'र
‘कर्कश’
कौन
महफ़िल
में
सुनेगा
लोग
सारे
नाच
गाने
में
लगे
हैं
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Surendra Karkash
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दौर
ये
पहली
नज़र
के
प्यार
का
है
सब
यहाँ
चेहरा
सजाने
में
लगे
हैं
बाँटता
हैं
ग़म
यहाँ
पे
कौन
किसका
यार
बस
दारू
पिलाने
में
लगे
हैं
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Surendra Karkash
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डिस्को
पसंद
सबको
तो
शेर-ओ-सुखन
हमें
अब
महफ़िलों
में
अपनी
वो
जादूगरी
गई
हैं
फैज़
ग़म
जवानी
में
जुज़
इश्क़
और
भी
या
नौकरी
मिली
नहीं
या
नौकरी
गई
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Surendra Karkash
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