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Sultan
kuchh tu hi mere dard ka mazmoon samajh le
kuchh tu hi mere dard ka mazmoon samajh le | कुछ तू ही मेरे दर्द का मज़मून समझ ले
- Sultan
कुछ
तू
ही
मेरे
दर्द
का
मज़मून
समझ
ले
हंसता
हुआ
चेहरा
तो
ज़माने
के
लिए
है
- Sultan
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ख़ुद
को
शीशा
कर
लिया
है
यार
मैंने
अब
तो
तेरा
देखना
बनता
है
मुझ
को
Neeraj Neer
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देखने
के
लिए
सारा
आलम
भी
कम
चाहने
के
लिए
एक
चेहरा
बहुत
Asad Badayuni
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उनकी
आँखों
में
ये
आँखें
थी
और
इन
आँखों
में
वो
आईने
के
सामने
रक्खा
हुआ
था
आईना
Bhaskar Shukla
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तेरा
लिक्खा
जो
पढ़ूँ
तो
तेरी
आवाज़
सुनूँ
तेरी
आवाज़
सुनूँ
तो
तेरा
चेहरा
देखूँ
Bhaskar Shukla
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ज़रा
विसाल
के
बाद
आइना
तो
देख
ऐ
दोस्त
तिरे
जमाल
की
दोशीज़गी
निखर
आई
Firaq Gorakhpuri
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ज़ख़्म
की
इज़्ज़त
करते
हैं
देर
से
पट्टी
खोलेंगे
चेहरा
पढ़ने
वाले
चोर
गठरी
थोड़ी
खोलेंगे
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Khurram Afaq
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कल
चौदहवीं
की
रात
थी
शब
भर
रहा
चर्चा
तिरा
कुछ
ने
कहा
ये
चाँद
है
कुछ
ने
कहा
चेहरा
तिरा
Ibn E Insha
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दर्द
चेहरा
पहन
के
आया
था
तेरा
चेहरा
था
सो
क़ुबूल
किया
Aslam Rashid
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ये
हक़ीक़त
है,
मज़हका
नहीं
है
वो
बहुत
दूर
है,
जुदा
नहीं
है
तेरे
होंटों
पे
रक़्स
करता
है
राज़
जो
अब
तलक
खुला
नहीं
है
जान
ए
जांँ
तेरे
हुस्न
के
आगे
ये
जो
शीशा
है,
आइना
नहीं
है
क्यूँ
शराबोर
हो
पसीने
में
मैं
ने
बोसा
अभी
लिया
नहीं
है
उस
का
पिंदार
भी
वहीं
का
वहीं
मेरे
लब
पर
भी
इल्तेजा
नहीं
है
जो
भी
होना
था
हो
चुका
काज़िम
अब
किसी
से
हमें
गिला
नहीं
है
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Kazim Rizvi
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तेरा
चेहरा
सुब्ह
का
तारा
लगता
है
सुब्ह
का
तारा
कितना
प्यारा
लगता
है
तुम
से
मिल
कर
इमली
मीठी
लगती
है
तुम
से
बिछड़
कर
शहद
भी
खारा
लगता
है
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Kaif Bhopali
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मायूसियों
के
दौर
में
किन
हसरतों
के
साथ
हम
पत्थरों
के
दिल
में
ख़ुदा
ढूंढते
रहे
Sultan
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आ
जा
के
बेकरारियाँ
हद
से
गुज़र
गई
अब
ज़ख़्म
इंतेज़ार
का
नासूर
हो
गया
Sultan
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तुम
सेे
मिले
ना
थे
तो
कोई
आरज़ू
ना
थी
देखा
तुझे
तो
तेरे
तलबगार
हो
गए
Sultan
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यूँँ
तो
गुज़रे
हैं
बहुत
अहले
मुहब्बत
लेकिन
हम
से
आशुफ्ता
सर्
इस
शहरस
कम
गुज़रे
हैं
Sultan
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भूल
जाने
का
तुझे
कैसे
तसव्वुर
कर
लूँ
मेरे
हर
ख़्वाब
की
रुठी
हुई
ता'बीर
है
तू
Sultan
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