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Sudarshan Fakir
aadmi aadmi ko kya dega
aadmi aadmi ko kya dega | आदमी आदमी को क्या देगा
- Sudarshan Fakir
आदमी
आदमी
को
क्या
देगा
जो
भी
देगा
वही
ख़ुदा
देगा
मेरा
क़ातिल
ही
मेरा
मुंसिब
है
क्या
मेरे
हक़
में
फ़ैसला
देगा
ज़िन्दगी
को
क़रीब
से
देखो
इसका
चेहरा
तुम्हें
रुला
देगा
हम
सेे
पूछो
दोस्ती
का
सिला
दुश्मनों
का
भी
दिल
हिला
देगा
इश्क़
का
ज़हर
पी
लिया
'फ़ाकिर'
अब
मसीहा
भी
क्या
दवा
देगा
- Sudarshan Fakir
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'असद'
ये
शर्त
नहीं
है
कोई
मुहब्बत
में
कि
जिस
सेे
प्यार
करो
उसकी
आरज़ू
भी
करो
Subhan Asad
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दूजा
इश्क़
किया
तो
ये
मालूम
हुआ
पहले
वाले
में
भी
ग़लती
मेरी
थी
Tanoj Dadhich
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हासिल
नहीं
हुआ
है
मोहब्बत
में
कुछ
मगर
इतना
तो
है
कि
ख़ाक
उड़ाना
तो
आ
गया
Amaan Haider
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किताब-ए-इश्क़
में
हर
आह
एक
आयत
है
पर
आँसुओं
को
हुरूफ़-ए-मुक़त्तिआ'त
समझ
Umair Najmi
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कभी
कभी
तो
झगड़ने
का
जी
भी
चाहेगा
मगर
ये
जंग
मोहब्बत
से
जीती
जाएगी
Amaan Abbas Naqvi
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मुझ
में
थोड़ी
सी
जगह
भी
नहीं
नफ़रत
के
लिए
मैं
तो
हर
वक़्त
मोहब्बत
से
भरा
रहता
हूँ
Mirza Athar Zia
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इसी
फ़कीर
की
गफ़लत
से
आगही
ली
है
मेरे
चराग़
से
सूरज
ने
रौशनी
ली
है
गली-गली
में
भटकता
है
शोर
करता
हुआ
हमारे
इश्क़
ने
सस्ती
शराब
पी
ली
है
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Ammar Iqbal
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दौलतें
मुद्दा
बनीं
या
ज़ात
आड़े
आ
गई
इश्क़
में
कोई
न
कोई
बात
आड़े
आ
गई
Baghi Vikas
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बहुत
आसान
है
कहना,
बुरा
क्या
है
भला
क्या
है
करोगे
इश्क़
तब
मालूम
होगा,
मसअला
क्या
है
Bhaskar Shukla
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मैं
चाहता
हूँ
मोहब्बत
मेरा
वो
हाल
करे
कि
ख़्वाब
में
भी
दोबारा
कभी
मजाल
न
हो
Jawwad Sheikh
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ज़िक्र
जब
होगा
मोहब्बत
में
तबाही
का
कहीं
याद
हम
आएँगे
दुनिया
को
हवालों
की
तरह
Sudarshan Fakir
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इश्क़
है
इश्क़
ये
मज़ाक़
नहीं
चंद
लम्हों
में
फ़ैसला
न
करो
Sudarshan Fakir
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सामने
है
जो
उसे
लोग
बुरा
कहते
हैं
जिस
को
देखा
ही
नहीं
उस
को
ख़ुदा
कहते
हैं
ज़िंदगी
को
भी
सिला
कहते
हैं
कहने
वाले
जीने
वाले
तो
गुनाहों
की
सज़ा
कहते
हैं
फ़ासले
उम्र
के
कुछ
और
बढ़ा
देती
है
जाने
क्यूँँ
लोग
उसे
फिर
भी
दवा
कहते
हैं
चंद
मासूम
से
पत्तों
का
लहू
है
'फ़ाकिर'
जिस
को
महबूब
की
हाथों
की
हिना
कहते
हैं
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Sudarshan Fakir
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फ़लसफ़े
इश्क़
में
पेश
आए
सवालों
की
तरह
हम
परेशाँ
ही
रहे
अपने
ख़यालों
की
तरह
शीशागर
बैठे
रहे
ज़िक्र-ए-मसीहा
ले
कर
और
हम
टूट
गए
काँच
के
प्यालों
की
तरह
जब
भी
अंजाम-ए-मोहब्बत
ने
पुकारा
ख़ुद
को
वक़्त
ने
पेश
किया
हम
को
मिसालों
की
तरह
ज़िक्र
जब
होगा
मोहब्बत
में
तबाही
का
कहीं
याद
हम
आएँगे
दुनिया
को
हवालों
की
तरह
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Sudarshan Fakir
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आप
कहते
थे
कि
रोने
से
न
बदलेंगे
नसीब
उम्र
भर
आप
की
इस
बात
ने
रोने
न
दिया
Sudarshan Fakir
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