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Shashank Shekhar Pathak
tumhein naaz hai husn par to suno tum
tumhein naaz hai husn par to suno tum | तुम्हें नाज़ है हुस्न पर तो सुनो तुम
- Shashank Shekhar Pathak
तुम्हें
नाज़
है
हुस्न
पर
तो
सुनो
तुम
मुझे
भी
जुदाई
का
अब
डर
न
होता
- Shashank Shekhar Pathak
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थी
वस्ल
में
भी
फ़िक्र-ए-जुदाई
तमाम
शब
वो
आए
तो
भी
नींद
न
आई
तमाम
शब
Momin Khan Momin
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दिल
को
तेरी
चाहत
पे
भरोसा
भी
बहुत
है
और
तुझ
से
बिछड़
जाने
का
डर
भी
नहीं
जाता
Ahmad Faraz
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हिज्र
में
इश्क़
यूँँ
रखा
आबाद
हिचकियाँ
तन्हा
तन्हा
लेते
रहे
Siraj Tonki
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मैं
न
कहता
था
हिज्र
कुछ
भी
नहीं
ख़ुद
को
हलकान
कर
रही
थी
तुम
कितने
आराम
से
हैं
हम
दोनों
देखा
बेकार
डर
रही
थी
तुम
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Mehshar Afridi
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क्यूँ
हिज्र
के
सभी
को
क़िस्से
सुना
रहे
हो
ग़म
बेचते
हो
सबको
ग़म
की
दुकान
हो
तुम
Amaan Pathan
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कितना
भी
दर्द
पिला
दे
ख़ुदा
पी
सकता
हूँ
ज़िन्दगी
हिज्र
से
भर
दे
मिरी
जी
सकता
हूँ
हर
दफ़ा
दिल
पे
ही
खा
के
हुई
है
आदत
ये
बंद
आँखों
से
भी
हर
ज़ख़्म
को
सी
सकता
हूँ
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Faiz Ahmad
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शब-ए-विसाल
बहुत
कम
है
आसमाँ
से
कहो
कि
जोड़
दे
कोई
टुकड़ा
शब-ए-जुदाई
का
Ameer Minai
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तुम
सेे
बिछड़
जाने
का
ख़याल
अच्छा
है
क्योंकि
अभी
मेरा
भी
हाल
अच्छा
है
उसने
पूछा
तुम्हें
कितनी
महोब्बत
है
मुझ
सेे
मैंने
कहा
मालूम
नहीं
सवाल
अच्छा
है
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karan singh rajput
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कोई
समुंदर,
कोई
नदी
होती
कोई
दरिया
होता
हम
जितने
प्यासे
थे
हमारा
एक
गिलास
से
क्या
होता
ताने
देने
से
और
हम
पे
शक
करने
से
बेहतर
था
गले
लगा
के
तुमने
हिजरत
का
दुख
बाट
लिया
होता
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Tehzeeb Hafi
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उस
हिज्र
पे
तोहमत
कि
जिसे
वस्ल
की
ज़िद
हो
उस
दर्द
पे
ला'नत
की
जो
अशआ'र
में
आ
जाए
Vipul Kumar
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यही
सोचता
हूँ
मैं
हर
पल
मिरी
जाँ
कि
मुझ
सेे
जुदा
क्यूँँ
है
तक़दीर
तेरी
वो
बिंदी,
वो
काजल,
वो
कानों
में
झुमके
रुलाती
है
अक्सर
वो
तसवीर
तेरी
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Shashank Shekhar Pathak
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कुछ
ऐसे
मैंने
टूटे
दिल
की
साख
बचा
रक्खी
है
तस्वीर
जला
दी
उसकी
लेकिन
राख
बचा
रक्खी
है
तुम
क्या
जानो
क्या
गुज़री
है
मुझ
जैसे
इन
पेड़ों
पर
कैसे
पतझड़
में
पेड़ों
ने
अपनी
शाख
बचा
रक्खी
है
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Shashank Shekhar Pathak
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तेरे
आने
की
ख़ुशी
है
न
है
फ़ुर्क़त
का
ग़म
ग़म
ये
है
बीत
गए
प्यार
के
सावन
कितने
Shashank Shekhar Pathak
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मैंने
की
है
इब़ादत
उसी
के
लिए
मेरे
हक़
में
दु'आ
वो
जो
पढ़ता
नहीं
आज
भी
मेंहदी
वो
रचाते
मिला
जिस
पे
रंग-ए-मुहब़्बत
भी
चढ़ता
नहीं
मैं
उसे
भूलना
चाहता
हूँ
मग़र
जिस्म
से
कोई
आगे
ही
बढ़ता
नहीं
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Shashank Shekhar Pathak
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जीते
जी
मरना
होता
है
तुम
क्या
जानो
क्या
होता
है
इश्क़
करोगे
तब
समझोगे
इश्क़
नहीं
पूरा
होता
है
मिलना
और
बिछड़
जाना
है
खेल
नहीं
किस्मत
का
'पाठक'
हो
ही
जाता
है
वो
अक्सर
होना
जिसे
जुदा
होता
है
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Shashank Shekhar Pathak
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