kuchh aur ishq karne hain haajat-ravaai ko | कुछ और इश्क़ करने हैं हाजत-रवाई को

  - Srishti Alok
कुछऔरइश्क़करनेहैंहाजत-रवाईको
कुछरोज़होगएहैंकिएबे-वफ़ाईको
करतेक़त्अहमयेतअल्लुक़तोऔरकौन
आगेखड़ाहुआथातेरीरह-नुमाईको
लेकरमरज़येआपभीमस्जिदमेंजाइए
आरामकुछदवासेनहींपार-साईको
होगामुझसेइश्क़दुबाराकिसीतरह
करतेरहेजोयादमिरीकज-अदाईको
जोतीसराहैफ़र्दमसाइलकाहैसबब
शेर-ओ-सुख़नसेकामनहींदो-तिहाईको
जिसहालमेंहैंआजवोअफ़सोस-नाकहै
करतेहैंख़ूबयादमगरइब्तिदाईको
हँसतेथेजोसुख़नये'आलोक'हैंवही
अबदेखतेहैंदूरसेतेरीरसाईको
  - Srishti Alok
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