jang men kaam alam-daar nahin aa sakte | जंग में काम अलम-दार नहीं आ सकते

  - Srishti Alok
जंगमेंकामअलम-दारनहींसकते
फिरभीइनहाथोंमेंहथियारनहींसकते
कमज़मीनोंपेचलाहूँमैंफ़क़ीरोंकीतरह
मेरेरस्तोंपेज़मीं-दारनहींसकते
आपकेआनेकीख़बरोंपेयक़ींकैसेकरूँँ
सुब्हकोगाँवमेंअख़बारनहींसकते
बसयेपैग़ामहैतज़ईन-ए-दर-ओ-बाम-ए-हरम
ग़ैर-मज़हबकेपरस्तारनहींसकते
बनकेमारीचपुकारोहोमगररामक़सम
ऐसेधोकेमेंसमझदारनहींसकते
मैंज़रूरतमेंअकेलाथालिहाज़ा'आलोक'
मुझकोपानेमिरेहक़दारनहींसकते
  - Srishti Alok
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy