hi
0
Search
Shayari
Writers
Events
Blog
Store
Help
Login
By:
00:00/00:00
Sohil Barelvi
kah rahi hai udaasi jhunjhla kar
kah rahi hai udaasi jhunjhla kar | कह रही है उदासी झुँझला कर
- Sohil Barelvi
कह
रही
है
उदासी
झुँझला
कर
कब
से
हँसते
ही
जा
रहे
हो
तुम
- Sohil Barelvi
Download Sher Image
वो
अजब
शख़्स
था
हर
हाल
में
ख़ुश
रहता
था
उस
ने
ता-उम्र
किया
हँस
के
सफ़र
बारिश
में
Sahiba sheharyaar
Send
Download Image
34 Likes
बंद
कमरे
में
हज़ारों
मील
अब
चलते
हैं
हम
काफ़ी
महँगी
पड़
रही
है
शा'इरी
से
दोस्ती
Ashraf Jahangeer
Send
Download Image
34 Likes
ज़हीफ़ी
इस
लिए
मुझको
सुहानी
लग
रही
है
इसे
कमाने
में
पूरी
जवानी
लग
रही
है
नतीजा
ये
है
कि
बरसों
तलाश-ए-ज़ात
के
बाद
वहाँ
खड़ा
हूँ
जहाँ
रेत
पानी
लग
रही
है
Read Full
Khalid Sajjad
Send
Download Image
24 Likes
मेरी
हर
बात
बे-असर
ही
रही
नक़्स
है
कुछ
मिरे
बयान
में
क्या
Jaun Elia
Send
Download Image
51 Likes
न
हम-सफ़र
न
किसी
हम-नशीं
से
निकलेगा
हमारे
पाँव
का
काँटा
हमीं
से
निकलेगा
Rahat Indori
Send
Download Image
53 Likes
प्यार
करने
की
हिम्मत
नहीं
उनके
पास
और
हम
सेे
किनारा
भी
होता
नहीं
बात
सीधे
कही
भी
नहीं
जा
रही
और
कोई
इशारा
भी
होता
नहीं
उसको
उम्मीद
है
ऐश
होगी
बसर
साथ
में
जब
रहेगी
मिरे
वो
मगर
मुझपे
जितनी
मुहब्बत
बची
है
सखी
इतने
में
तो
गुज़ारा
भी
होता
नहीं
Read Full
Divyansh "Dard" Akbarabadi
Send
Download Image
14 Likes
उन्हीं
रास्तों
ने
जिन
पर
कभी
तुम
थे
साथ
मेरे
मुझे
रोक
रोक
पूछा
तिरा
हम-सफ़र
कहाँ
है
Bashir Badr
Send
Download Image
39 Likes
मुझे
एक
लाश
कहकर
न
बहाओ
पानियों
में
मेरा
हाथ
छू
के
देखो
मेरी
नब्ज़
चल
रही
है
Azm Shakri
Send
Download Image
38 Likes
मुसाफ़िरों
के
दिमाग़ों
में
डर
ज़ियादा
है
न
जाने
वक़्त
है
कम
या
सफ़र
ज़ियादा
है
Hashim Raza Jalalpuri
Send
Download Image
46 Likes
अब
उसकी
शादी
का
क़िस्सा
न
छेड़ो
बस
इतना
कह
दो
कैसी
लग
रही
थी
Zubair Ali Tabish
Send
Download Image
138 Likes
Read More
हर
तरह
के
हैं
लोग
दुनिया
में
सिर्फ़
ख़ुद
को
बुरा
नहीं
कहते
Sohil Barelvi
Send
Download Image
0 Likes
मिरी
ग़ैर-मौजूदगी
में
सनम
ने
किसी
दूसरे
का
सहारा
लिया
है
Sohil Barelvi
Send
Download Image
1 Like
तबाही
की
तरफ़
ले
जा
रही
थी
जो
दौलत
मुफ़्त
में
हम
को
मिली
थी
अचानक
हो
गई
तब्दील
ग़म
में
मिरे
हिस्से
में
जितनी
भी
ख़ुशी
थी
जो
मंज़र
था
हमारे
रू-ब-रू
था
घुटन
बाहरस
अंदर
आ
रही
थी
उगाईं
ज़ख़्म
की
अश्कों
ने
फ़स्लें
मेरे
दिल
की
ज़मीं
बंजर
पड़ी
थी
तबाह
होने
से
यूँँ
भी
बच
गया
मैं
मिरे
होटों
पे
इक
उँगली
रखी
थी
उसे
भी
कर
दिया
बे-रंग
तुम
ने
मिरे
अंदर
जो
इक
दुनिया
बसी
थी
तवज्जोह
दे
नहीं
पाया
किसी
को
अकेले-पन
की
आदत
पड़
गई
थी
Read Full
Sohil Barelvi
Download Image
1 Like
ये
तू
किस
शक्ल
में
आया
है
क़ासिद
बशारत
रास्ते
में
मर
गई
क्या?
Sohil Barelvi
Send
Download Image
0 Likes
इक
कहानी
हो
गए
दुख
जावेदानी
हो
गए
दुख
कुछ
को
जीता
कुछ
जिगर
में
अब
निशानी
हो
गए
दुख
रात
तारे
गिनते
गिनते
आसमानी
हो
गए
दुख
ख़ुद
को
छोटा
कर
लिया
जब
मेरे
सानी
हो
गए
दुख
हल्का
हल्का
लग
रहा
दिल
जब
से
पानी
हो
गए
दुख
शब
ढले
आया
अँधेरा
रात-रानी
हो
गए
दुख
Read Full
Sohil Barelvi
Download Image
1 Like
Read More
Bahadur Shah Zafar
Vishal Bagh
Sarvat Husain
Shahzad Ahmad
Hafeez Banarasi
Unknown
Krishna Bihari Noor
Khalid Nadeem Shani
Shahid Zaki
Abbas Tabish
Get Shayari on your Whatsapp
Hijr Shayari
DP Shayari
Wedding Shayari
Tamanna Shayari
Mood off Shayari