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Sohil Barelvi
kitnii lambi ye zindagaani hai
kitnii lambi ye zindagaani hai | कितनी लंबी ये ज़िंदगानी है
- Sohil Barelvi
कितनी
लंबी
ये
ज़िंदगानी
है
तुझ
को
पा
कर
ये
बात
जानी
है
जिस्म
बे-शक
हमारा
फ़ानी
है
उम्र
हम
को
मगर
बितानी
है
रोज़
भरती
है
कान
दुनिया
के
एक
दीवार
मुझ
को
ढानी
है
राज़
तू
ने
अयाँ
किए
सब
पर
तुझ
से
हर
बात
अब
छुपानी
है
काश
मुझ
पर
भी
तारी
हो
जाए
मेरी
ग़ज़लों
में
जो
रवानी
है
ज़िंदगी
से
भी
जंग
लड़नी
है
मौत
को
आँख
भी
दिखानी
है
ये
मिरे
ज़ब्त
का
करिश्मा
है
मेरी
आँखों
में
सिर्फ़
पानी
है
मैं
अभी
गर्क़
हो
के
उभरा
हूँ
मुझ
से
हर
एक
शय
पुरानी
है
सामने
रख
दिया
जिगर
उस
के
मुझ
पे
जिस
ने
कमान
तानी
है
उस
से
कुछ
दूरियाँ
बना
लेना
जिस
ने
बस
हारने
की
ठानी
है
- Sohil Barelvi
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बद-हवा
सेी
है
बे-ख़याली
है
क्या
ये
हालत
भी
कोई
हालत
है
ज़िंदगी
से
है
जंग
शाम-ओ-सहर
मौत
से
शिकवा
है
शिकायत
है
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Chandan Sharma
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तुम
भी
साबित
हुए
कमज़ोर
मुनव्वर
राना
ज़िन्दगी
माँगी
भी
तुमने
तो
दवा
से
माँगी
Munawwar Rana
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ग़म-ए-हयात
में
यूँँ
ढह
गया
नसीब
का
घर
कि
जैसे
बाढ़
में
डूबा
हुआ
गरीब
का
घर
वबायें
आती
गईं
और
लोग
मरते
गए
हमारे
गाँव
में
था
ही
नहीं
तबीब
का
घर
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Ashraf Ali
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ज़िंदगी
यूँँ
हुई
बसर
तन्हा
क़ाफ़िला
साथ
और
सफ़र
तन्हा
Gulzar
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आधी
आधी
रात
तक
सड़कों
के
चक्कर
काटिए
शा'इरी
भी
इक
सज़ा
है
ज़िंदगी
भर
काटिए
कोई
तो
हो
जिस
से
उस
ज़ालिम
की
बातें
कीजिए
चौदहवीं
का
चाँद
हो
तो
रात
छत
पर
काटिए
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Nisar Nasik
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जब
से
हुआ
है
कंधे
से
बस्ते
का
बोझ
कम
बढ़ते
ही
जा
रहे
हैं
मेरी
ज़िंदगी
में
ग़म
Ankit Maurya
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तल्ख़ियाँ
इस
में
बहुत
कुछ
हैं
मज़ा
कुछ
भी
नहीं
ज़िंदगी
दर्द-ए-मोहब्बत
के
सिवा
कुछ
भी
नहीं
Kaleem Aajiz
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हर
एक
काम
है
धोका
हर
एक
काम
है
खेल
कि
ज़िंदगी
में
तमाशा
बहुत
ज़रूरी
है
Khaleel Mamoon
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गँवाई
किस
की
तमन्ना
में
ज़िंदगी
मैं
ने
वो
कौन
है
जिसे
देखा
नहीं
कभी
मैं
ने
Jaun Elia
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ज़िंदगी
एक
फ़न
है
लम्हों
को
अपने
अंदाज़
से
गँवाने
का
Jaun Elia
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क्यूँँ
नहीं
आए
ये
मेरे
सर
में
ज़ख़्म
भरते
नहीं
दिसंबर
में
ग़ौर
से
देख
लूटने
वाले
और
कुछ
तो
नहीं
बचा
घर
में
वक़्त-ए-आख़िर
लगा
दिया
मैंने
ज़ोर
जितना
भी
था
मिरे
पर
में
इक
तो
दुनिया
ख़िलाफ़
है
मेरे
और
तू
भी
नहीं
मुक़द्दर
में
क्या
पता
कब
इधर
ख़िज़ाँ
आई
मैं
तो
खोया
रहा
गुल-ए-तर
में
जिस्म
बाहर
पड़ा
रहा
और
मैं
डूब
कर
मर
गया
समुंदर
में
तैश
में
आ
गए
मियाँ
'सोहिल'
और
फिर
कुछ
नहीं
बचा
घर
में
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Sohil Barelvi
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अश्क
कम
हों
तो
लहू
अपनी
रवानी
लेगा
मैं
किसी
शे'र
को
बे-जान
न
होने
दूँगा
Sohil Barelvi
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कंठ
से
ज़हर
नीचे
आ
पहुँचा
भोले
शंकर
मदद
करो
मेरी
Sohil Barelvi
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तू
ने
खो
कर
मुझे
जिसे
पाया
इल्तिजा
है
उसे
नहीं
खोना
Sohil Barelvi
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चैन
से
सो
नहीं
सके
दो
लोग
एक
दूजे
को
वक़्त
दे
कर
भी
Sohil Barelvi
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