hi
0
Search
Shayari
Writers
Events
Blog
Store
Help
Login
By:
00:00/00:00
Simar Gozra
suraj kahtaa saaya kya hai
suraj kahtaa saaya kya hai | सूरज कहता साया क्या है
- Simar Gozra
सूरज
कहता
साया
क्या
है
पानी
कहता
शीशा
क्या
है
जिस्म
ख़रीदा
जा
सकता
है
और
यहाँ
पे
सस्ता
क्या
है
जिसके
साथ
थी
रात
गुज़ारी
वो
अब
मेरा
लगता
क्या
है
पास
में
आ
और
बात
तो
कर
मुझको
देख
के
हँसता
क्या
है
मंज़िल
तक
तो
तब
मैं
जाऊँ
पहले
बताओ
रस्ता
क्या
है
सागर
से
तुम
बूँद
का
पूछो
आँख
से
पूछो
दरिया
क्या
है
- Simar Gozra
Download Ghazal Image
जब
मस्तक
पर
ही
लिख
दी
थी
अँधेरे
की
लौ
तो
फिर
हम
क्या
उसका
सुहाग
रौशन
करते
Simar Gozra
Send
Download Image
1 Like
मैं
नहीं
चाहता
वो
मुझको
इज़हार
करे
गर
मैं
करूँॅं
तो
फिर
वो
क्यूँँॅं
इनकार
करे
उसको
चाहने
वालों
मुझ
सेे
पूछो
तुम
वो
मर
जाए
जो
भी
उस
सेे
प्यार
करे
सुना
कि
वो
गुज़रे
तो
बारिश
होती
है
ऐसा
है
तो
सहरा
में
बौछार
करे
चाहत
रखने
से
नई
लैला
मिल
जाती
कोई
मजनू
के
जैसा
भी
प्यार
करे
Read Full
Simar Gozra
Download Image
4 Likes
ज़िंदगी
से
यही
शिकायत
है
अपनी
ही
जान
से
फ़िराक़त
है
ख़ुद
ख़ुदा
भी
हसीन
ही
होगा
उसका
बंदा
जो
ख़ूब-सूरत
है
Read Full
Simar Gozra
Send
Download Image
2 Likes
अब
मेरे
पास
कुछ
भी
मेरा
नहीं
जाँ
थी
इक
वो
भी
ले
गया
कोई
Simar Gozra
Send
Download Image
2 Likes
हम
भी
अपने
घर
के
चराग़
रौशन
करते
परिंदों
को
घर
देते
कि
बाग़
रौशन
करते
Simar Gozra
Send
Download Image
1 Like
Read More
Vishal Singh Tabish
Iftikhar Arif
Jaleel Manikpuri
Haseeb Soz
Abhishar Geeta Shukla
Ibn E Insha
Nazeer Banarasi
Muneer Niyazi
Iftikhar Naseem
Iqbal Ashhar
Get Shayari on your Whatsapp
Rahbar Shayari
Awaaz Shayari
Mahatma Gandhi Shayari
Charagh Shayari
Inquilab Shayari