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Simar Gozra
dard se dil laga raha hooñ main
dard se dil laga raha hooñ main | दर्द से दिल लगा रहा हूँ मैं
- Simar Gozra
दर्द
से
दिल
लगा
रहा
हूँ
मैं
ज़ख़्म
की
ओर
जा
रहा
हूँ
मैं
देखो
रौनक़
ये
मेरे
चेहरे
पर
उसके
कूचे
से
आ
रहा
हूँ
मैं
दिल
में
जिनके
लिए
थी
वहशत
अब
गले
उनको
लगा
रहा
हूँ
मैं
ज़िंदा
इक
शख़्स
मर
गया
मुझ
में
ख़ुद
को
ख़ुद
याद
आ
रहा
हूँ
मैं
दिल
में
आँखों
में
क़दमों
में
उसके
बे-सबब
हर
जगह
रहा
हूँ
मैं
हँसता
रहता
हूँ
आज
कल
जो
अब
कुछ
न
कुछ
तो
छुपा
रहा
हूँ
मैं
- Simar Gozra
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कोई
अपना
ही
था
मेरा
शायद
दे
गया
होगा
बददुआ
शायद
अब
मुझे
जाने
दो
कि
मेरा
वक़्त
वक़्त
से
पहले
आ
गया
शायद
एक
बच्चा
जो
घर
के
झगड़ों
में
मेरे
अंदर
ही
मर
गया
शायद
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Simar Gozra
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अब
मेरे
पास
कुछ
भी
मेरा
नहीं
जाँ
थी
इक
वो
भी
ले
गया
कोई
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हर
इक
साँस
कि
जैसे
कोई
मिस्रा
हो
ज़िन्दगी
भी
शा'इरी
के
जैसी
काटी
है
शौक़
तो
शायर
बनने
का
था
मुझको
पर
ये
मत
पूछो
नौकरी
कैसी
काटी
है
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उसके
शहर
के
लड़के
होंगे
मरते
होंगे
वो
जो
उस
पे
मरते
होंगे
मरते
होंगे
ख़ल्वत
कैसे
ज़िंदगी
को
खा
जाती
है
दोस्त
इश्क़
से
जो
भी
डरते
होंगे
मरते
होंगे
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Simar Gozra
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रख
लिया
जाए
या
फ़ना
किया
जाए
इस
तबीअत
का
बोलो
क्या
किया
जाए
इश्क़
करना
अगर
बुरा
है
तो
फिर
अब
मेरे
साथ
भी
बुरा
किया
जाए
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Simar Gozra
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