hi
0
Search
Shayari
Writers
Events
Blog
Store
Help
Login
By:
00:00/00:00
Shubh Mathur
sukhe zaKHmon ko phir se haraa karti hai
sukhe zaKHmon ko phir se haraa karti hai | सूखे ज़ख़्मों को फिर से हरा करती है
- Shubh Mathur
सूखे
ज़ख़्मों
को
फिर
से
हरा
करती
है
ये
हिज्र
की
बारिशें
लानत
सी
लगती
हैं
- Shubh Mathur
Download Sher Image
उस
सेे
तो
मैं
बिछड़
गया
अब
देख
ऐ
'पवन'
कब
दुनिया
आए
रास
यही
सोचता
रहा
Pawan Kumar
Send
Download Image
16 Likes
बहन
का
प्यार
जुदाई
से
कम
नहीं
होता
अगर
वो
दूर
भी
जाए
तो
ग़म
नहीं
होता
Unknown
Send
Download Image
35 Likes
आई
होगी
किसी
को
हिज्र
में
मौत
मुझ
को
तो
नींद
भी
नहीं
आती
Akbar Allahabadi
Send
Download Image
38 Likes
वो
एक
शख़्स
जो
दिखने
में
ठीक-ठाक
सा
था
बिछड़
रहा
था
तो
लगने
लगा
हसीन
बहुत
Siraj Faisal Khan
Send
Download Image
27 Likes
हमारे
दरमियाँ
जो
प्यार
से
पहले
की
यारी
थी
बिछड़
कर
अब
ये
लगता
है
वो
यारी
ज़्यादा
प्यारी
थी
बिछड़ना
उसकी
मर्ज़ी
थी,
उसे
उतरन
न
कहना
तुम
वो
अब
उतनी
ही
उसकी
है
वो
तब
जितनी
तुम्हारी
थी
Read Full
Alankrat Srivastava
Send
Download Image
10 Likes
तू
परिंदा
है
किसी
शाख़
को
घर
कर
लेगा
जो
तेरे
हिज्र
का
मारा
है
किधर
जाएगा
Shadab Javed
Send
Download Image
34 Likes
तुम
सेे
बिछड़
के
हम
को
यही
लग
रहा
है
अब
जैसे
मिटा
दिया
है
ख़ुदा
ने
लिखा
हुआ
Siddharth Saaz
Send
Download Image
5 Likes
हिज्र
में
अब
वो
रात
हुई
है
जिस
में
मुझको
ख़्वाबों
में
रेल
की
पटरी,
चाकू,
रस्सी,
बहती
नदियाँ
दिखती
हैं
Read Full
Dipendra Singh 'Raaz'
Send
Download Image
2 Likes
सुकून
देती
थी
तब
मुझको
वस्ल
की
सिगरेट
अब
उसके
हिज्र
के
फ़िल्टर
से
होंठ
जलते
हैं
Upendra Bajpai
Send
Download Image
22 Likes
काट
पाऊँगा
मैं
कैसे
ज़िंदगी
तेरे
बग़ैर
तीन
दिन
का
हिज्र
मुझ
को
लग
रहा
है
तीन
साल
Afzal Ali Afzal
Send
Download Image
10 Likes
Read More
उन
आँखों
का
क़र्ज़-ए-मुहब्बत
भी
अदा
कैसे
करें
जिन
आँखों
ने
खोए
हैं
सपने
मेरे
सपनों
के
लिए
Shubh Mathur
Send
Download Image
3 Likes
हमदर्दी
के
नक़्श-ए-पा
को
धोता
जाए
इक
दरिया
जो
ज़हर
का
शहर
में
बहता
जाए
Shubh Mathur
Send
Download Image
2 Likes
वो
जो
कह
रहा
है
मुझको
कभी
भूलना
नहीं
तुम
वो
जो
कह
रहा
है
जैसे
कोई
बात
कहने
की
हो
Shubh Mathur
Send
Download Image
0 Likes
अपने
तक
रहना
नहीं
ख़ुद
से
निकलना
भी
है
फिर
मुझे
आइने
की
शक्ल
में
ढलना
भी
है
कितनी
बातें
जो
सहज
ही
उसे
कह
देनी
हैं
इक
मगर
वो
जिसे
कहने
को
मचलना
भी
है
Read Full
Shubh Mathur
Send
Download Image
1 Like
जो
होता
है
नज़र
में
आना
तेरा
तो
बनता
है
कोई
अफ़साना
तेरा
मेरी
हर
ग़लती
पे
पछताना
तेरा
दोबारा
ख़ुद
को
यूँॅं
समझाना
तेरा
मेरी
आँखों
से
पढ़
के
देख
मुझको
अभी
यकसाँ
नहीं
पैमाना
तेरा
तरी
आँखों
से
देखा
है
शजर
ने
परिंदे
की
तरह
उड़
जाना
तेरा
दिलों
की
उलझनें
कम
होती
जाऍं
मेरे
सर
को
मिले
गर
शाना
तेरा
तबस्सुम
खिल
गए
पतझड़
में
जब
भी
हुआ
है
मुस्कुरा
के
आना
तेरा
वो
रस्ते
जो
सदाऍं
देते
हैं
ना
वहाँ
पर
रहता
है
परवाना
तेरा
Read Full
Shubh Mathur
Download Image
1 Like
Read More
Akbar Allahabadi
Krishna Bihari Noor
Shariq Kaifi
Mohammad Alvi
Anjum Rehbar
Abhishar Geeta Shukla
Ali Zaryoun
Zehra Nigaah
Amjad Islam Amjad
Asad Bhopali
Get Shayari on your Whatsapp
Sharm Shayari
Aasman Shayari
Mehnat Shayari
Justice Shayari
Relationship Shayari