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Shubh Mathur
hamdar
hamdar | हमदर्दी के नक़्श-ए-पा को धोता जाए
- Shubh Mathur
हमदर्दी
के
नक़्श-ए-पा
को
धोता
जाए
इक
दरिया
जो
ज़हर
का
शहर
में
बहता
जाए
- Shubh Mathur
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बहुत
ग़ुरूर
है
दरिया
को
अपने
होने
पर
जो
मेरी
प्यास
से
उलझे
तो
धज्जियाँ
उड़
जाएँ
Rahat Indori
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चलो
न
फिर
से
दरिया
के
नज़दीक
चलें
चलो
न
फिर
से
डुबकी
साथ
लगाएँगे
Atul K Rai
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आँख
आँसू
को
ऐसे
रस्ता
देती
है
जैसे
रेत
गुज़रने
दरिया
देती
है
कोई
भी
उसको
जीत
नहीं
पाया
अब
तक
वैसे
वो
हर
एक
को
मौक़ा
देती
है
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Kafeel Rana
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मेरे
जुनूँ
का
नतीजा
ज़रूर
निकलेगा
इसी
सियाह
समुंदर
से
नूर
निकलेगा
Ameer Qazalbash
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ये
इश्क़
नहीं
आसाँ
इतना
ही
समझ
लीजे
इक
आग
का
दरिया
है
और
डूब
के
जाना
है
Jigar Moradabadi
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ज़िन्दगी
पर
लिख
दिया
था
नाम
मैंने
राम
का
और
फिर
दुख
के
समुंदर
पार
सारे
हो
गए
Tanoj Dadhich
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इशरत-ए-क़तरा
है
दरिया
में
फ़ना
हो
जाना
दर्द
का
हद
से
गुज़रना
है
दवा
हो
जाना
Mirza Ghalib
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दरिया
की
वुसअतों
से
उसे
नापते
नहीं
तन्हाई
कितनी
गहरी
है
इक
जाम
भर
के
देख
Adil Mansuri
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ज़रा
पाने
की
चाहत
में
बहुत
कुछ
छूट
जाता
है
नदी
का
साथ
देता
हूँ
समुंदर
रूठ
जाता
है
Aalok Shrivastav
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बातचीत
में
आला
हो
बस
ठीक
न
हो
फ़ाइदा
क्या
महबूब
अगर
बारीक
न
हो
हम
तेरी
क़ुर्बत
में
अक्सर
सोचते
हैं
दरिया
खेत
के
इतना
भी
नज़दीक
न
हो
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Khurram Afaq
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जो
भी
उसे
फ़रियाद
हो
हल
हो
अगर
संवाद
हो
वो
लब
कहें
इरशाद
तो
ये
शे'र
भी
आबाद
हो
हर
साँस
का
भी
दम
घुटे
इक
साँस
भी
बर्बाद
हो
अपने
परों
को
नोंचता
पंछी
कभी
आज़ाद
हो
अब
छोड़
के
अपनी
अना
जा
इश्क़
कर
बर्बाद
हो
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Shubh Mathur
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जो
होता
है
नज़र
में
आना
तेरा
तो
बनता
है
कोई
अफ़साना
तेरा
मेरी
हर
ग़लती
पे
पछताना
तेरा
दोबारा
ख़ुद
को
यूँॅं
समझाना
तेरा
मेरी
आँखों
से
पढ़
के
देख
मुझको
अभी
यकसाँ
नहीं
पैमाना
तेरा
तरी
आँखों
से
देखा
है
शजर
ने
परिंदे
की
तरह
उड़
जाना
तेरा
दिलों
की
उलझनें
कम
होती
जाऍं
मेरे
सर
को
मिले
गर
शाना
तेरा
तबस्सुम
खिल
गए
पतझड़
में
जब
भी
हुआ
है
मुस्कुरा
के
आना
तेरा
वो
रस्ते
जो
सदाऍं
देते
हैं
ना
वहाँ
पर
रहता
है
परवाना
तेरा
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Shubh Mathur
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वो
जो
कह
रहा
है
मुझको
कभी
भूलना
नहीं
तुम
वो
जो
कह
रहा
है
जैसे
कोई
बात
कहने
की
हो
Shubh Mathur
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अपने
तक
रहना
नहीं
ख़ुद
से
निकलना
भी
है
फिर
मुझे
आइने
की
शक्ल
में
ढलना
भी
है
कितनी
बातें
जो
सहज
ही
उसे
कह
देनी
हैं
इक
मगर
वो
जिसे
कहने
को
मचलना
भी
है
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Shubh Mathur
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कह
दो
अगर
तक्सीम
सरमाया
हो
मेरे
इश्क़
का
सब
छोड़ो
बस
स्पर्श
हाथों
का
अदा
कर
दोगी
ना
Shubh Mathur
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