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Shubham Nankani
mehfilon ne diya hai ham ko kya
mehfilon ne diya hai ham ko kya | महफ़िलों ने दिया है हम को क्या
- Shubham Nankani
महफ़िलों
ने
दिया
है
हम
को
क्या
तुम
मिले
हो
मैं
हूँ
मिला
मुझ
से
- Shubham Nankani
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मेहनत
तो
करता
हूँ
फिर
भी
घर
ख़ाली
है
बाबूजी
मिट्टी
के
कुछ
दीपक
ले
लो
दीवाली
है
बाबूजी
मिट्टी
बेच
रहा
हूँ
जिस
में
कोई
जाल
फ़रेब
नहीं
सोना
चाँदी
दूध
मिठाई
सब
जा'ली
है
बाबूजी
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Gyan Prakash Akul
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उसने
हम
सेे
बातें
करना
छोड़
दिया
माँ
की
जिस
सेे
बात
कराने
वाले
थे
Tanoj Dadhich
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आज
तो
दिल
के
दर्द
पर
हँस
कर
दर्द
का
दिल
दुखा
दिया
मैं
ने
Zubair Ali Tabish
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उसके
हाथ
में
बाक़ी
क्या
रह
जाता
है
तुमने
जिसका
हाथ
पकड़कर
छोड़
दिया
Vashu Pandey
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तमाम
शहर
को
तारीकियों
से
शिकवा
है
मगर
चराग़
की
बैअत
से
ख़ौफ़
आता
है
Aziz Nabeel
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बीस
बरस
से
इक
तारे
पर
मन
की
जोत
जगाता
हूँ
दीवाली
की
रात
को
तू
भी
कोई
दिया
जलाया
कर
Majid Ul Baqri
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कहाँ
चराग़
जलाएँ
कहाँ
गुलाब
रखें
छतें
तो
मिलती
हैं
लेकिन
मकाँ
नहीं
मिलता
Nida Fazli
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तुझे
किसी
ने
ग़लत
कह
दिया
मेरे
बारे
नहीं
मियाँ
मैं
दिलों
को
दुखाने
वाला
नहीं
Ali Zaryoun
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कहाँ
तो
तय
था
चराग़ाँ
हर
एक
घर
के
लिए
कहाँ
चराग़
मुयस्सर
नहीं
शहर
के
लिए
Dushyant Kumar
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तमाम
बातें
जो
चाहता
था
मैं
तुम
सेे
कहना
वो
एक
काग़ज़
पे
लिख
के
काग़ज़
जला
दिया
है
Dipendra Singh 'Raaz'
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तेरी
फूँक
का
ही
सहारा
है
माँ
मुझे
दर्द
सारा
गवारा
है
माँ
Shubham Nankani
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इसलिए
थाम
रक्खा
है
जाना
मेरा
फिर
नहीं
आएगा
अब
ज़माना
मेरा
Shubham Nankani
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राह
तकते
हैं
लोग
कितने
बरस
फिर
ख़ुदास
ये
रूठते
हैं
कहीं
Shubham Nankani
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फूल
महके
है
जब
हो
साथ
ज़मीं
फिर
मिले
हम
महक
रही
वो
नहीं
राह
तकते
हैं
लोग
कितने
बरस
फिर
ख़ुदास
ये
रूठते
हैं
कहीं
ये
मुलाक़ात
आख़री
समझो
फिर
कहो
देर
तक
तकूँ
कि
नहीं
मुझ
में
अच्छा
न
कुछ
बचा
यारों
फिर
भी
आई
नज़र
न
तुम
को
कमीं
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Shubham Nankani
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वो
क्या
वक़्त
था
याद
आता
है
पर
अब
अजब
दौर
नफ़रत
भी
मुमकिन
है
उस
से
Shubham Nankani
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