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Ramnath Shodharthi
taanaashaahi pe hawaayein bhi utar aayi hain ab
taanaashaahi pe hawaayein bhi utar aayi hain ab | तानाशाही पे हवाएँ भी उतर आई हैं अब
- Ramnath Shodharthi
तानाशाही
पे
हवाएँ
भी
उतर
आई
हैं
अब
मैंने
आवाज़
उठाई
तो
बुझा
डाला
मुझे
- Ramnath Shodharthi
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शब
भर
इक
आवाज़
बनाई
सुब्ह
हुई
तो
चीख़
पड़े
रोज़
का
इक
मामूल
है
अब
तो
ख़्वाब-ज़दा
हम
लोगों
का
Abhishek shukla
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तेरी
आवाज़
को
इस
शहर
की
लहरें
तरसती
हैं
ग़लत
नंबर
मिलाता
हूँ
तो
पहरों
बात
होती
है
Ghulam Mohammad Qasir
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अब
उस
के
दर
से
भी
आवाज़
आती
है
कि
नहीं
बता
रे
ज़िन्दगी
तू
बाज़
आती
है
कि
नहीं
बहकने
लगता
है
जब
जब
किसी
के
प्यार
में
दिल
तो
तेरी
याद
यूँंँ
आके
डराती
है
कि
नहीं
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Faiz Ahmad
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जब
उसने
पलट
कर
नहीं
देखा
तो
ये
जाना
आवाज़
लगाने
में
भी
नुक़सान
बहुत
है
Imtiyaz Khan
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तुमको
फ़िराक-ए-यार
ने
मिस्मार
कर
दिया
मुझको
फ़िराक-ए-यार
ने
फ़नकार
कर
दिया
गुल
से
मुतालिबा
जो
किया
बोसे
का
शजर
गुल
ने
हिला
के
पत्तियाँ
इनकार
कर
दिया
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Shajar Abbas
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'मीर'
के
दीन-ओ-मज़हब
को
अब
पूछते
क्या
हो
उन
ने
तो
क़श्क़ा
खींचा
दैर
में
बैठा
कब
का
तर्क
इस्लाम
किया
Meer Taqi Meer
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मिरी
ख़ामोशियों
की
झील
में
फिर
किसी
आवाज़
का
पत्थर
गिरा
है
Aadil Raza Mansoori
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करने
को
कुछ
नहीं
है
नए
साल
में
'यशब'
क्यूँ
न
किसी
से
तर्क-ए-मोहब्बत
ही
कीजिए
Yashab Tamanna
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अब
के
हम
तर्क-ए-रसूमात
करके
देखते
हैं
बीच
वालों
के
बिना
बात
करके
देखते
हैं
इस
सेे
पहले
कि
कोई
फ़ैसला
तलवार
करे
आख़िरी
बार
मुलाक़ात
करके
देखते
हैं
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Abrar Kashif
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वरना
बे-मौत
ही
मर
जाएँगे
सारे
किरदार
एक
इनकार
ज़रूरी
है
कहानी
के
लिए
Madan Mohan Danish
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अकेला
पहले
से
ही
था
मैं
लेकिन
अभी
काफ़ी
अकेला
हो
गया
हूॅं
Ramnath Shodharthi
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हमारे
मुल्क
में
चारों
तरफ़
है
अम्न-ओ-अमान
बहुत
दबाव
में
यह
बात
कह
रहा
हूँ
मैं
Ramnath Shodharthi
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छोड़िए
!
आपसे
क्या
पूछना
मंज़िल
का
पता
आप
ख़ुद
उंगली
किसी
और
की
पकड़े
हुए
हैं
Ramnath Shodharthi
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हम
वही
हैं
जो
कभी
रौनक़-ए-महफ़िल
थे
यहाँ
और
अभी
कोई
हमें
पूछने
वाला
भी
नहीं
Ramnath Shodharthi
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ऐसा
लगता
है
हमें
आपके
आते-आते
कहीं
महरूम
से
मरहूम
न
हो
जाएँ
हम
Ramnath Shodharthi
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