hon jawaan jab samajh nahin aata | हों जवाँ जब समझ नहीं आता

  - Shivang Tiwari
होंजवाँजबसमझनहींआता
सब्रमतलबसमझनहींआता
तजरबेउम्रसेहीमिलतेहैं
येमगरतबसमझनहींआता
अजनबीजानेकौनहैउस
में
आइनाअबसमझनहींआता
कोईरहबरपताबताएमुझे
हैकहाँरबसमझनहींआता
क्यूँँलकीरोंमेंतुमनहींहोमेरी
रोताहूँजबसमझनहींआता
कैसेकहदूँबिछड़गयातुमसेे
तुममिलींकबसमझनहींआता
दूररहनेसेइश्क़बढ़ताहै
मुझकोसाहबसमझनहींआता
ग़मग़लतशामकोजोकरताहूँ
क्यूँँख़फ़ासबसमझनहींआता
जोकभीपीनेबैठजाऊँशिवम्उठनाहैकबसमझनहींआता
  - Shivang Tiwari
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy