teri aañkhen kisi bhi qaifiyat men mubtala karne ko kaafi hain | "तेरी आँखें किसी भी क़ैफ़ियत में मुब्तला करने को काफ़ी हैं"

  - Shehbaz Gohar
"तेरीआँखेंकिसीभीक़ैफ़ियतमेंमुब्तलाकरनेकोकाफ़ीहैं"
तेरीआँखेंकिसीभीक़ैफ़ियतमेंमुब्तलाकरनेकोकाफ़ीहैं
तेरेआँसूकिसीभीग़ममेंरोयेआँसुओंमेंसबसेेअफ़जलहैं
तेरेरूख़्सारजिनहाथोंपेउतरेहैं
वहीदस्त-ए-हसींसय्याहगाहोेमेंनएरस्तेदिखातेहैं
तेरेलहज़ेमेंअच्छेदिननिकलतेहैं
तेरेहोंठोंसेनिकलेलफ़्ज़नज़्मेंहैं
येउननज़्मोंसेबेहतरहैजोमैंनेतंगदस्तीकेज़मानेमेंलिखीथी
तुझेनज़दीकसेजोदेखतेहैंउनकीक़िस्मतहै
वगरनाख़्वाबहरइकआँखपरनाज़िलनहींहोते
तूबरतरहैसितारोंऔररंगोंसेभरेगाँवोंसेबरतरहै
अगरतूखंडहरोंमेंजाबसेफिरभीतेराचेहराकभीमद्धमनहींहोगा
खंडहरआबादहोंगेपुरानेघरनईगलियोॆसेहीआबादहोतेहैं
  - Shehbaz Gohar
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