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karan singh rajput
mohabbat men ab sab ulta ho raha hai
mohabbat men ab sab ulta ho raha hai | मोहब्बत में अब सब उल्टा हो रहा है
- karan singh rajput
मोहब्बत
में
अब
सब
उल्टा
हो
रहा
है
मगर
लगता
है
कुछ
अच्छा
हो
रहा
है
रो
रही
है
वो
मेरे
लौट
जाने
को
लेकर
मेरे
साथ
पहली
बार
ऐसा
हो
रहा
है
- karan singh rajput
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पास
मैं
जिसके
हूँ
वो
फिर
भी,
अच्छा
लड़का
ढूँढ़
रही
है
उसने
लगा
रक्खा
है
चश्मा,
और
वो
चश्मा
ढूँढ़
रही
है
फ़ोन
किया
मैंने
और
पूछा,
अब
तक
घर
से
क्यूँँ
नहीं
निकली
उस
ने
कहा
मुझ
सेे
मिलने
का,
एक
बहाना
ढूँढ़
रही
है
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Tanoj Dadhich
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मुक़र्रर
दिन
नहीं
तो
लम्हा-ए-इमकान
में
आओ
अगर
तुम
मिल
नहीं
सकती
तो
मेरे
ध्यान
में
आओ
बला
की
ख़ूब-सूरत
लग
रही
हो
आज
तो
जानाँ
मुझे
इक
बात
कहनी
थी
तुम्हारे
कान
में..
आओ
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Darpan
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मेरी
हर
बात
बे-असर
ही
रही
नक़्स
है
कुछ
मिरे
बयान
में
क्या
Jaun Elia
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वो
आँखें
चुप
थीं
लेकिन
हँस
रही
थीं
मेरा
जी
कर
रहा
था
चूम
लूँ
अब
Ritesh Rajwada
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उन्हीं
रास्तों
ने
जिन
पर
कभी
तुम
थे
साथ
मेरे
मुझे
रोक
रोक
पूछा
तिरा
हम-सफ़र
कहाँ
है
Bashir Badr
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नहीं
निगाह
में
मंज़िल
तो
जुस्तुजू
ही
सही
नहीं
विसाल
मुयस्सर
तो
आरज़ू
ही
सही
Faiz Ahmad Faiz
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इश्क़
अगर
बढ़ता
है
तो
फिर
झगड़े
भी
तो
बढ़ते
हैं
आमदनी
जब
बढ़ती
है
तो
ख़र्चे
भी
तो
बढ़ते
हैं
माना
मंज़िल
नहीं
मिली
है
हमको
लेकिन
रोज़ाना
एक
क़दम
उसकी
जानिब
हम
आगे
भी
तो
बढ़ते
हैं
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Tanoj Dadhich
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आ
रही
है
जो
बहू
सीधी
रहे
माँ
चाहती
जा
रही
बेटी
मगर
चालाक
होनी
चाहिए
Tanoj Dadhich
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मंज़िल
पे
न
पहुँचे
उसे
रस्ता
नहीं
कहते
दो
चार
क़दम
चलने
को
चलना
नहीं
कहते
इक
हम
हैं
कि
ग़ैरों
को
भी
कह
देते
हैं
अपना
इक
तुम
हो
कि
अपनों
को
भी
अपना
नहीं
कहते
कम-हिम्मती
ख़तरा
है
समुंदर
के
सफ़र
में
तूफ़ान
को
हम
दोस्तो
ख़तरा
नहीं
कहते
बन
जाए
अगर
बात
तो
सब
कहते
हैं
क्या
क्या
और
बात
बिगड़
जाए
तो
क्या
क्या
नहीं
कहते
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Nawaz Deobandi
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बहुत
क़रीब
रही
है
ये
ज़िन्दगी
हम
से
बहुत
अज़ीज़
सही
ए'तिबार
कुछ
भी
नहीं
Akhtar Saeed Khan
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अच्छा
नईं
था
जो
हुआ
था
वाक़िया
कल
रोका
नईं
मेरा
किसी
ने
रास्ता
कल
आख़िरी
ख़त
उसका
देकर
मुझको
मेरे
सामने
ही
रो
पड़ा
था
डाकिया
कल
साथ
उसके
और
कोई
भी
था
मैंने
एक
अरसे
बाद
उसको
देखा
था
कल
तेरे
ग़म
ने
मुझको
पागल
कर
दिया
है
भूल
बैठा
था
मैं
घर
का
रास्ता
कल
किस
तरह
गुज़रेगा
दिन
कल
का
मेरे
दोस्त
होने
वाला
है
नया
इक
हादसा
कल
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karan singh rajput
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अब
मौत
का
भी
डर
रखूँ
दिल
में
अगर
तो
फिर
गुज़ारूँ
ज़िन्दगी
क्या
सोचकर
karan singh rajput
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मुक़ददर
भी
है
कोई
चीज
मेरे
दोस्त
दुनिया
में
कि
जिस
सेे
प्यार
हो
उस
सेे
ही
शादी
थोड़ी
होती
है
karan singh rajput
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ख़ुद-ब-ख़ुद
ही
खिल
उठा
चेहरा
मेरा
प्यार
से
बहनों
ने
बाँधी
राखी
जब
karan singh rajput
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अगर
अब
भी
कभी
उसकी
गली
से
जब
गुजरते
है
युहीँ
कुछ
देर
फिर
हम
उसके
घर
आगे
ठहरते
है
karan singh rajput
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