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karan singh rajput
khaamoshi mat raha karo batao kuchh bataati hui achchhii lagti ho
khaamoshi mat raha karo batao kuchh bataati hui achchhii lagti ho | ख़ामोश मत रहा करो, बताओ कुछ, बताती हुई अच्छी लगती हो
- karan singh rajput
ख़ामोश
मत
रहा
करो,
बताओ
कुछ,
बताती
हुई
अच्छी
लगती
हो
ये
क्या
है
मायूश
क्यूँ
हो,
मुस्कराओ,
मुस्कराती
हुई
अच्छी
लगती
हो
- karan singh rajput
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ग़लत
बातों
को
ख़ामोशी
से
सुनना
हामी
भर
लेना
बहुत
हैं
फ़ाएदे
इस
में
मगर
अच्छा
नहीं
लगता
Javed Akhtar
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कम
अज़
कम
इक
ज़माना
चाहता
हूँ
कि
तुम
को
भूल
जाना
चाहता
हूँ
ख़ुदारा
मुझ
को
तन्हा
छोड़
दीजे
मैं
खुल
कर
मुस्कुराना
चाहता
हूँ
सरासर
आप
हूँ
मद्दे
मुक़ाबिल
ख़ुदी
ख़ुद
को
हराना
चाहता
हूँ
मेरे
हक़
में
उरूस-ए-शब
है
मक़्तल
सो
उस
से
लब
मिलाना
चाहता
हूँ
ये
आलम
है,
कि
अपने
ही
लहू
में
सरासर
डूब
जाना
चाहता
हूँ
सुना
है
तोड़ते
हो
दिल
सभों
का
सो
तुम
से
दिल
लगाना
चाहता
हूँ
उसी
बज़्म-ए-तरब
की
आरज़ू
है
वही
मंज़र
पुराना
चाहता
हूँ
नज़र
से
तीर
फैंको
हो,
सो
मैं
भी
जिगर
पर
तीर
खाना
चाहता
हूँ
चराग़ों
को
पयाम-ए-ख़ामुशी
दे
तेरे
नज़दीक
आना
चाहता
हूँ
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Kazim Rizvi
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मैं
उस
को
देख
के
चुप
था
उसी
की
शादी
में
मज़ा
तो
सारा
इसी
रस्म
के
निबाह
में
था
Muneer Niyazi
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क्या
ख़ूब
तुम
ने
ग़ैर
को
बोसा
नहीं
दिया
बस
चुप
रहो
हमारे
भी
मुँह
में
ज़बान
है
Mirza Ghalib
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फिर
ख़मोशी
ने
साज़
छेड़ा
है
फिर
ख़यालात
ने
ली
अँगड़ाई
Javed Akhtar
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वो
आँखें
चुप
थीं
लेकिन
हँस
रही
थीं
मेरा
जी
कर
रहा
था
चूम
लूँ
अब
Ritesh Rajwada
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उसे
बेचैन
कर
जाऊँगा
मैं
भी
ख़मोशी
से
गुज़र
जाऊँगा
मैं
भी
Ameer Qazalbash
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चुप
हुए
तो
घर
से
निकले
जा
के
दफ़्तर
रो
पड़े
इश्क़
ऐसी
जंग
है
जिस
में
सिकंदर
रो
पड़े
बस
दिलों
पर
कब
किसी
का
चल
सका
है
इश्क़
में
फिर
से
डायल
कर
के
हम
वो
एक
नंबर
रो
पड़े
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Prashant Sharma Daraz
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जो
चुप-चाप
रहती
थी
दीवार
पर
वो
तस्वीर
बातें
बनाने
लगी
Adil Mansuri
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अब
तो
चुप-चाप
शाम
आती
है
पहले
चिड़ियों
के
शोर
होते
थे
Mohammad Alvi
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ज़िन्दगी
कब
रास
आने
वाली
थी
ये
तो
बस
हमने
ही
सौदा
कर
लिया
karan singh rajput
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मुझे
छोड़
देता
था
जब
चाहे
वो
मोहब्बत
में
मेरी
क़दर
थी
यही
karan singh rajput
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कम
देखता
हूँ
आईने
में
चेहरा
अपना
तब
से
मैं
जब
से
कहा
है
तूने
ये
सूरत
नहीं
अच्छी
मेरी
karan singh rajput
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वो
मेरे
साथ
ख़ुश
रहता
था
पर
कहता
नहीं
था
कुछ
बिछड़कर
मुझ
सेे
अब
उसको
भी
क्या
हासिल
हुआ
होगा
karan singh rajput
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लोगों
पर
अब
भरोसा
नहीं
है
मैं
हवाओं
से
दुख
बाँटता
हूँ
karan singh rajput
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