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karan singh rajput
kaise ho kya karte ho rahte kahaan ho kya hai ye sab
kaise ho kya karte ho rahte kahaan ho kya hai ye sab | कैसे हो? क्या करते हो? रहते कहाँ हो? क्या है ये सब
- karan singh rajput
कैसे
हो?
क्या
करते
हो?
रहते
कहाँ
हो?
क्या
है
ये
सब
तुम
भी
वो
ही
पूछते
हो
यार
जो
सब
पूछते
है
- karan singh rajput
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मैं
सात
साल
से
अब
तक
हिसार-ए-इश्क़
में
हूँ
वो
शख़्स
आज
भी
मेरे
दिल-ओ-दिमाग़
में
है
Amaan Haider
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कुछ
एक
की
हम
जैसी
क़िस्मत
होती
है
बाकी
सब
की
अच्छी
क़िस्मत
होती
है
Bhaskar Shukla
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रखे
है
लज़्ज़त-ए-बोसा
से
मुझ
को
गर
महरूम
तो
अपने
तू
भी
न
होंटों
तलक
ज़बाँ
पहुँचा
Jurat Qalandar Bakhsh
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माँ-बाबा
का
सोच
के
हर
दम
रुक
जाता
हूँ
वरना
तो
इतने
ग़म
में
मैंने
पंखे
से
टंग
कर
मर
जाना
था
Shashwat Singh Darpan
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अगर
हुकूमत
तुम्हारी
तस्वीर
छाप
दे
नोट
पर
मेरी
दोस्त
तो
देखना
तुम
कि
लोग
बिल्कुल
फिजूलखर्ची
नहीं
करेंगे
हमारे
चंद
अच्छे
दोस्तों
ने
ये
वा'दा
ख़ुद
से
किया
हुआ
है
कि
शक्ल
अल्लाह
ने
अच्छी
दी
है
सो
बातें
अच्छी
नहीं
करेंगे
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Rehman Faris
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गले
में
उस
के
ख़ुदा
की
अजीब
बरकत
है
वो
बोलता
है
तो
इक
रौशनी
सी
होती
है
Bashir Badr
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सितारे
और
क़िस्मत
देख
कर
घर
से
निकलते
हैं
जो
बुज़दिल
हैं
मुहूरत
देखकर
घर
से
निकलते
हैं
हमें
लेकिन
सफ़र
की
मुश्किलों
से
डर
नहीं
लगता
कि
हम
बच्चों
की
सूरत
देखकर
घर
से
निकलते
हैं
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Abrar Kashif
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रात
हो,
चाँद
हो,
बारिश
भी
हो
और
तुम
भी
हो
ऐसा
मुमकिन
ही
नहीं
है
कि
कभी
हो
मिरे
साथ
Faiz Ahmad
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प्यास
जहाँ
की
एक
बयाबाँ
तेरी
सख़ावत
शबनम
है
पी
के
उठा
जो
बज़्म
से
तेरी
और
भी
तिश्ना-काम
उठा
Ali Sardar Jafri
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है
अब
भी
बिस्तर-ए-जाँ
पर
तिरे
बदन
की
शिकन
मैं
ख़ुद
ही
मिटने
लगा
हूँ
उसे
मिटाते
हुए
Azhar Iqbal
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पहले
होली
गई
फिर
दिवाली
गई
बिन
तेरे
अब
मेरी
ईद
ख़ाली
गई
karan singh rajput
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ये
तिरी
ख्वाइश
है
जाँ
तुझे
किसके
साथ
रहना
है
एक
तिरा
हुस्न
देखता
है
एक
तुझ
में
प्यार
देखता
है
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karan singh rajput
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आबाद
गर
नहीं
मैं
तो
बर्बाद
ही
सही
तुम
नहीं
हो
तो
तुम्हारी
याद
ही
सही
karan singh rajput
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मैं
भले
उसको
नईं
मानता
हूँ
पर
वो
है
इतना
तो
जानता
हूँ
मेरी
भी
ज़िन्दगी
है
ये
कोई?
ख़ाक
हूँ,
ख़ाक
को
छानता
हूँ
ढूँढ़
लूँगा
अगर
खो
गए
तुम
ख़ुद
को
इतना
मैं
पहचानता
हूँ
तुम
रुलाना
अगर
जानती
हो
तो
भुलाना
मैं
भी
जानता
हूँ
जान
दूँ
क्या
मैं
इस
बात
पर
अब
मेरी
ग़लती
है,
मैं
मानता
हूँ
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karan singh rajput
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बुढापे
में
उसी
ने
हाथ
नईं
थामा
किसी
का
भी
कि
बचपन
में
जिसे
सब
सेे
ज़ियादा
प्यार
मिलता
था
karan singh rajput
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