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karan singh rajput
chaar hi din the kya zindagi ke liyena mila koi bhi aashiqi ke li.e
chaar hi din the kya zindagi ke liyena mila koi bhi aashiqi ke li.e | चार ही दिन थे क्या ज़िन्दगी के लिए
- karan singh rajput
चार
ही
दिन
थे
क्या
ज़िन्दगी
के
लिए
ना
मिला
कोई
भी
आशिक़ी
के
लिए
हाथ
आँखों
पे
धरने
लगा
चाँद
अब
एक
उस
की
ही
बेपर्दगी
के
लिए
पूजते
है
उसे
जो
कि
दिखता
नहीं
लोग
सब
करते
है
बंदगी
के
लिए
देता
है
तो
दे
इक
दो
सदी
ऐ
ख़ुदा
चार
दिन
कम
है
आवारगी
के
लिए
ना
गिला
कोई
ना
ही
शिकायत
कोई
कुछ
तो
हो
उन
सेे
नाराजगी
के
लिए
आदमी
देता
है
हर
जहाँ
को
ख़ुशी
ख़ुद
तरसता
है
इक
इक
ख़ुशी
के
लिए
दुख
भरी
ज़िन्दगी
के
सिवा
दुनिया
में
अब
बचा
ही
क्या
है
आदमी
के
लिए
- karan singh rajput
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सभी
के
साथ
दिखना
भी
मगर
सब
सेे
जुदा
रहना
भी
है
उसको
उदासी
साथ
भी
रखनी
है
और
तस्वीर
में
हँसना
भी
है
उसको
Kafeel Rana
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ख़ून
से
जोड़ा
हुआ
हर
ईंट
ढेला
हो
गया
दो
तरफ़
चूल्हे
जले
औ'
घर
अकेला
हो
गया
Dhiraj Singh 'Tahammul'
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मुझ
ऐसा
शख़्स
अगर
क़हक़हों
से
भर
जाए
ये
साँस
लेती
उदासी
तो
घुट
के
मर
जाए
वो
मेरे
बाद
तरस
जाएगा
मोहब्बत
को
उसे
ये
कहना
अगर
हो
सके
तो
मर
जाए
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Rakib Mukhtar
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मैं
चाहता
था
मुझ
सेे
बिछड़
कर
वो
ख़ुश
रहे
लेकिन
वो
ख़ुश
हुआ
तो
बड़ा
दुख
हुआ
मुझे
Umair Najmi
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जो
सावन
होते
सूखा,
उस
फूल
पे
लानत
हो
मुझ
पे
लानत,
तेरे
होते,
यार
उदासी
है
Siddharth Saaz
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रूमाल
ले
लिया
है
किसी
माह-जबीन
से
कब
तक
पसीना
पोंछते
हम
आस्तीन
से
ये
आँसुओं
के
दाग़
हैं,
आँसू
ही
धोएँगे
ये
दाग़
धुल
न
पाएँगे
वाशिंग
मशीन
से
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Waseem Nadir
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यूँँ
ही
थोड़ी
मेरी
गज़लों
में
इतना
दुख
होता
है
इस
दुनिया
ने
हम
लड़कों
से
रोने
का
हक़
छीना
है
Harsh saxena
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ख़मोशी
तो
यही
बतला
रही
है
उदासी
रास
मुझको
आ
रही
है
मुझे
जिन
ग़लतियों
से
सीखना
था
वही
फिर
ज़िंदगी
दोहरा
रही
है
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Vishal Singh Tabish
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हम
कुछ
ऐसे
उसके
आगे
अपनी
वफ़ा
रख
देते
हैं
बच्चे
जैसे
रेल
की
पटरी
पर
सिक्का
रख
देते
हैं
तस्वीर-ए-ग़म,
दिल
के
आँसू,
रंजो-नदामत,
तन्हाई
उसको
ख़त
लिखते
हैं
ख़त
में
हम
क्या
क्या
रख
देते
हैं
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Subhan Asad
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पहले
ये
काम
बड़े
प्यार
से
माँ
करती
थी
अब
हमें
धूप
जगाती
है
तो
दुख
होता
है
Munawwar Rana
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एक
मुझ
सेे
ही
अदावत
करना
और
तो
सब
सेे
मुहब्बत
करना
karan singh rajput
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ख़ूबियाँ
सब
गिनवा
दी
मैंने
प
माँ
ने
पूछा
बस,
खाना
बनाना
जानती
है?
karan singh rajput
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पढ़ा
लिक्खा
तो
सब
कुछ
भूल
जाता
हूँ
मगर
हर
बात
उसकी
याद
रहती
है
karan singh rajput
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किसी
को
भी
कभी
ऐसी
सजा
न
हो
रहे
वो
साथ
जिसके
हम-नवा
न
हो
मेरे
लब
पे
है
रहती
ये
दु'आ
हर-दम
कभी
कोई
किसी
से
भी
जुदा
न
हो
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karan singh rajput
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कई
ग़म
से
परेशाँ
है
ख़ुशी
सबको
नहीं
हासिल
जहाँ
में
कोई
होता
है
कि
जो
बिखरा
नहीं
होता
karan singh rajput
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