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Shaukat Fehmi
deta nahin tha chaanv magar rakh liya gaya
deta nahin tha chaanv magar rakh liya gaya | देता नहीं था छाँव मगर रख लिया गया
- Shaukat Fehmi
देता
नहीं
था
छाँव
मगर
रख
लिया
गया
ईंधन
बनेगा
बूढ़ा
शजर
रख
लिया
गया
आँखों
में
उम्र
भर
की
मसाफ़त
समेट
कर
घर
जा
रहा
हूँ
मुझको
अगर
रख
लिया
गया
मुझको
थमा
दिया
गया
क़िस्मत
का
फ़ैसला
और
मेरी
मेहनतों
का
समर
रख
लिया
गया
- Shaukat Fehmi
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लड़
सको
दुनिया
से
जज़्बों
में
वो
शिद्दत
चाहिए
इश्क़
करने
के
लिए
इतनी
तो
हिम्मत
चाहिए
कम
से
कम
मैंने
छुपा
ली
देख
कर
सिगरेट
तुम्हें
और
इस
लड़के
से
तुमको
कितनी
इज़्ज़त
चाहिए
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Nadeem Shaad
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मेरा
क़ातिल
ही
मेरा
मुंसिफ़
है
क्या
मिरे
हक़
में
फ़ैसला
देगा
Sudarshan Fakir
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उस
ने
फिर
प्यार
जताया
है
ख़ुदा
ख़ैर
करे
कोई
तो
नेक
इरादा
है
ख़ुदा
ख़ैर
करे
Nami Nadri
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सारी
हिम्मत
टूट
गई,
बच्चों
से
ये
सुनकर
अब
भूखे
पेट
गुज़ारा
करने
की
हिम्मत
है
फूँका
घर,
भूखे
बच्चे,
टूटी
उम्मीदें,
अब
मुझ
में,
रस्सी
को
फंदा
करने
की
हिम्मत
है
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Aman G Mishra
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सब
की
हिम्मत
नहीं
ज़माने
में
लोग
डरते
हैं
मुस्कुराने
में
एक
लम्हा
भी
ख़र्च
होता
नहीं
मेरी
ख़ुशियों
को
आने
जाने
में
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Vishal Singh Tabish
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इश्क़
है
इश्क़
ये
मज़ाक़
नहीं
चंद
लम्हों
में
फ़ैसला
न
करो
Sudarshan Fakir
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इरादा
तो
नहीं
है
ख़ुद-कुशी
का
मगर
मैं
ज़िंदगी
से
ख़ुश
नहीं
हूँ
Vikas Sharma Raaz
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बिछड़ते
वक़्त
भी
हिम्मत
नहीं
जुटा
पाया
कभी
भी
उस
को
गले
से
नहीं
लगा
पाया
किसी
को
चाहते
रहने
की
सज़ा
पाई
है
मैं
चार
साल
में
लड़की
नहीं
पटा
पाया
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Shadab Asghar
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अब
के
हम
तर्क-ए-रसूमात
करके
देखते
हैं
बीच
वालों
के
बिना
बात
करके
देखते
हैं
इस
सेे
पहले
कि
कोई
फ़ैसला
तलवार
करे
आख़िरी
बार
मुलाक़ात
करके
देखते
हैं
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Abrar Kashif
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भूक
से
या
वबास
मरना
है
फ़ैसला
आदमी
को
करना
है
Ishrat Afreen
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अपनी
औक़ात
पर
उतर
आए
यार
भी
घात
पर
उतर
आए
पहले
मेरा
हुनर
खँगाला
और
फिर
मेरी
ज़ात
पर
उतर
आए
रंग
कच्चे
थे
सारे
तितली
के
सो
मेरे
हाथ
पर
उतर
आए
मैं
दलीलों
से
बात
करता
हूँ
आप
आयात
पर
उतर
आए
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Shaukat Fehmi
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बदला
जो
वक़्त
गहरी
रफ़ाक़त
बदल
गई
सूरज
ढला
तो
साए
की
सूरत
बदल
गई
इक
उम्र
तक
मैं
उसकी
ज़रूरत
बना
रहा
फिर
यूँँ
हुआ
कि
उसकी
ज़रूरत
बदल
गई
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Shaukat Fehmi
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इस
तरह
के
हरीफ़-ए-सख़्त
के
साथ
कौन
लड़ता
है
अपने
बख़्त
के
साथ
देखिये
क्या
हमें
गवारा
हो
एक
तख़्ता
धरा
है
तख़्त
के
साथ
वो
ज़रूरत
थी
या
मुहब्बत
थी
बेल
लिपटी
रही
दरख़्त
के
साथ
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Shaukat Fehmi
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वो
जो
बैठा
है
मेरी
राहों
में
उस
सेे
कह
दो
कि
घर
चला
जाए
Shaukat Fehmi
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वो
एक
शख़्स
किसी
तौर
जो
मेरा
न
हुआ
मेरी
बला
से
किसी
का
अगर
हुआ
न
हुआ
मुझे
फ़िराक़
ने
घेरा
तेरे
विसाल
के
बीच
मैं
एक
मचान
पे
बैठे
हुए
निशाना
हुआ
इसीलिए
मेरे
रस्ते
में
शाम
आई
है
मैं
अपनी
सम्त
बड़ी
देर
से
रवाना
हुआ
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Shaukat Fehmi
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