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Shashank Madhuri Shukla
hanste chehre ka haal dekho nakoi meraa rumal dekho na
hanste chehre ka haal dekho nakoi meraa rumal dekho na | हँसते चेहरे का हाल देखो ना
- Shashank Madhuri Shukla
हँसते
चेहरे
का
हाल
देखो
ना
कोई
मेरा
रुमाल
देखो
ना
हिज्र
के
बाद
उठ
रहे
मुझ
पर
कैसे
कैसे
सवाल
देखो
ना
रंग
तुम
पर
लगा
नहीं
पाया
हाथ
को
है
मलाल
देखो
ना
टूट
के,
फिर
यक़ीन
करता
हूँ
देखो
मेरी
मजाल
देखो
ना
चुकता
सब
का
हिसाब
करता
है
उस
ख़ुदा
का
कमाल
देखो
ना
- Shashank Madhuri Shukla
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वो
शादी
तो
करेगी
मगर
एक
शर्त
पर
हम
हिज्र
में
रहेंगे
अगर
नौकरी
नहीं
Harsh saxena
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बता
रहा
है
झटकना
तेरी
कलाई
का
ज़रा
भी
रंज
नहीं
है
तुझे
जुदाई
का
मैं
ज़िंदगी
को
खुले
दिल
से
खर्च
करता
था
हिसाब
देना
पड़ा
मुझको
पाई-पाई
का
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Azhar Faragh
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तू
परिंदा
है
किसी
शाख़
को
घर
कर
लेगा
जो
तेरे
हिज्र
का
मारा
है
किधर
जाएगा
Shadab Javed
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इस
से
पहले
कि
ज़मीं-ज़ाद
शरारत
कर
जाएँ
हम
सितारों
ने
ये
सोचा
है
कि
हिजरत
कर
जाएँ
दौलत-ए-ख़्वाब
हमारे
जो
किसी
काम
न
आई
अब
किसी
को
नहीं
मिलने
की
वसिय्यत
कर
जाएँ
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Idris Babar
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बिछड़
कर
मुझ
सेे
तुझको
क्या
मिला
है
कि
जो
कुछ
था
वो
भी
खोना
पड़ा
है
गया
था
जिस
जगह
पर
छोड़
कर
तू
उसी
रस्ते
पे
दिल
अब
भी
खड़ा
है
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ATUL SINGH
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हिज्र
में
ख़ुद
को
तसल्ली
दी
कहा
कुछ
भी
नहीं
दिल
मगर
हँसने
लगा
आया
बड़ा
कुछ
भी
नहीं
Afkar Alvi
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कितना
भी
दर्द
पिला
दे
ख़ुदा
पी
सकता
हूँ
ज़िन्दगी
हिज्र
से
भर
दे
मिरी
जी
सकता
हूँ
हर
दफ़ा
दिल
पे
ही
खा
के
हुई
है
आदत
ये
बंद
आँखों
से
भी
हर
ज़ख़्म
को
सी
सकता
हूँ
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Faiz Ahmad
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मैं
न
कहता
था
हिज्र
कुछ
भी
नहीं
ख़ुद
को
हलकान
कर
रही
थी
तुम
कितने
आराम
से
हैं
हम
दोनों
देखा
बेकार
डर
रही
थी
तुम
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Mehshar Afridi
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सरकार
कहने
लग
गया
वो
सीधे
नाम
से
जो
हम-क़लाम
कम
था
मेरे
पहले
नाम
से
मुझ
सेे
बिछड़
के
अपना
कोई
नाम
रख
लियो
सब
लोग
जानते
हैं
तुझे
मेरे
नाम
से
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Rishabh Sharma
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क्यूँ
हिज्र
के
सभी
को
क़िस्से
सुना
रहे
हो
ग़म
बेचते
हो
सबको
ग़म
की
दुकान
हो
तुम
Amaan Pathan
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इस
क़दर
भूलता
गया
हूँ
मैं
याद
आता
है
याद
करना
तुझे
Shashank Madhuri Shukla
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दोस्ती
सल्तनत
की
करता
है
बात
फिर
शहरियत
की
करता
है
ठान
ले
जब
सफ़र
में
बढ़ना
वो
तर्बियत
हैसियत
की
करता
है
छोड़
देता
है
जो
जहालत
को
रौशनी
दस्तख़त
की
करता
है
अपनी
नीयत
में
खोट
रख
कर
के
माँग
वो
दस्तख़त
की
करता
है
याद
करता
है
काम
पड़ने
पर
इल्तिजा
अहमियत
की
करता
है
करता
रहता
है
कामचोरी
जो
ख़्वाहिशें
वो
सिफ़त
की
करता
है
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Shashank Madhuri Shukla
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