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Shashank Madhuri Shukla
dosti saltanat ki karta hai
dosti saltanat ki karta hai | दोस्ती सल्तनत की करता है
- Shashank Madhuri Shukla
दोस्ती
सल्तनत
की
करता
है
बात
फिर
शहरियत
की
करता
है
ठान
ले
जब
सफ़र
में
बढ़ना
वो
तर्बियत
हैसियत
की
करता
है
छोड़
देता
है
जो
जहालत
को
रौशनी
दस्तख़त
की
करता
है
अपनी
नीयत
में
खोट
रख
कर
के
माँग
वो
दस्तख़त
की
करता
है
याद
करता
है
काम
पड़ने
पर
इल्तिजा
अहमियत
की
करता
है
करता
रहता
है
कामचोरी
जो
ख़्वाहिशें
वो
सिफ़त
की
करता
है
- Shashank Madhuri Shukla
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उन
रस
भरी
आँखों
में
हया
खेल
रही
है
दो
ज़हर
के
प्यालों
में
क़ज़ा
खेल
रही
है
Akhtar Shirani
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मुक़र्रर
दिन
नहीं
तो
लम्हा-ए-इमकान
में
आओ
अगर
तुम
मिल
नहीं
सकती
तो
मेरे
ध्यान
में
आओ
बला
की
ख़ूब-सूरत
लग
रही
हो
आज
तो
जानाँ
मुझे
इक
बात
कहनी
थी
तुम्हारे
कान
में..
आओ
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Darpan
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ज़हीफ़ी
इस
लिए
मुझको
सुहानी
लग
रही
है
इसे
कमाने
में
पूरी
जवानी
लग
रही
है
नतीजा
ये
है
कि
बरसों
तलाश-ए-ज़ात
के
बाद
वहाँ
खड़ा
हूँ
जहाँ
रेत
पानी
लग
रही
है
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Khalid Sajjad
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मेरे
होंठों
के
सब्र
से
पूछो
उसके
हाथों
से
गाल
तक
का
सफ़र
Mehshar Afridi
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सुखाई
जा
रही
है
जुल्फ़
धोकर
घटा
या'नी
निचोड़ी
जा
रही
है
Satya Prakash Soni
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यूँँ
ही
हमेशा
उलझती
रही
है
ज़ुल्म
से
ख़ल्क़
न
उनकी
रस्म
नई
है,
न
अपनी
रीत
नई
यूँँ
ही
हमेशा
खिलाए
हैं
हमने
आग
में
फूल
न
उनकी
हार
नई
है,
न
अपनी
जीत
नई
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Faiz Ahmad Faiz
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न
हम-सफ़र
न
किसी
हम-नशीं
से
निकलेगा
हमारे
पाँव
का
काँटा
हमीं
से
निकलेगा
Rahat Indori
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सिवा
इसके
कुछ
अच्छा
ही
नहीं
लगता
है
शामों
में
सफ़र
कैसा
भी
हो
घर
को
परिंदे
लौट
जाते
हैं
Aarush Sarkaar
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मैं
तेरे
साथ
सितारों
से
गुज़र
सकता
हूँ
कितना
आसान
मोहब्बत
का
सफ़र
लगता
है
Bashir Badr
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उसे
पागल
बनाती
फिर
रही
हो
जिसे
शौहर
बनाना
चाहिए
था
Arvind Inaayat
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हँसते
चेहरे
का
हाल
देखो
ना
कोई
मेरा
रुमाल
देखो
ना
हिज्र
के
बाद
उठ
रहे
मुझ
पर
कैसे
कैसे
सवाल
देखो
ना
रंग
तुम
पर
लगा
नहीं
पाया
हाथ
को
है
मलाल
देखो
ना
टूट
के,
फिर
यक़ीन
करता
हूँ
देखो
मेरी
मजाल
देखो
ना
चुकता
सब
का
हिसाब
करता
है
उस
ख़ुदा
का
कमाल
देखो
ना
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Shashank Madhuri Shukla
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इस
क़दर
भूलता
गया
हूँ
मैं
याद
आता
है
याद
करना
तुझे
Shashank Madhuri Shukla
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