KHvaab vaise to ik inaayat hai | ख़्वाब वैसे तो इक इनायत है

  - Shariq Kaifi
ख़्वाबवैसेतोइकइनायतहै
आँखखुलजाएतोमुसीबतहै
जिस्मआयाकिसीकेहिस्सेमें
दिलकिसीऔरकीअमानतहै
जानदेनेकावक़्तहीगया
इसतमाशेकेबा'दफ़ुर्सतहै
उम्रभरजिसकेमश्वरोंपेचले
वोपरेशानहैतोहैरतहै
अबसँवरनेकावक़्तउसकोनहीं
जबहमेंदेखनेकीफ़ुर्सतहै
उसपेउतनेहीरंगखुलतेहैं
जिसकीआँखोंमेंजितनीहैरतहै
  - Shariq Kaifi
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