ab kise yaad kis dhun men guzra tha pichla zam | अब किसे याद किस धुन में गुज़रा था पिछला ज़माना मेरा

  - Shariq Kaifi
अबकिसेयादकिसधुनमेंगुज़राथापिछलाज़मानामेरा
उड़नेवालीसियाहीसेलिक्खागयाथाफ़सानामेरा
तुमनहींजानतेयक-तरफ़ामुहब्बतकीमहरूमियाँ
तुमनेदेखानहींअपनीनज़रोंसेख़ुदकोछुपानामेरा
फिरतुम्हारेबराबरखड़ाशख़्सकुछइसतरहसेहँसा
जैसेतुमनेबतायाहोउसकोहैयेभीदीवानामेरा
अबबहुततेज़थीगूँजशहनाइयोंकीवोसुनताभीक्या
इकग़लतफ़ैसलाथाउसेउसघड़ीआज़मानामेरा
बसतुझेभूलजानेकाडरथाजोयेसबकरातारहा
वरनाक्याथातेरेशहरतकजाकेबसलौटआनामेरा
  - Shariq Kaifi
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy