kahii na tha vo dariyaa jis ka saahil tha main | कहीं न था वो दरिया जिस का साहिल था मैं

  - Shariq Kaifi
कहींथावोदरियाजिसकासाहिलथामैं
आँखखुलीतोइकसहराकेमुक़ाबिलथामैं
हासिलकरकेतुझकोअबशर्मिंदासाहूँ
थाइकवक़्तकिसच-मुचतेरेक़ाबिलथामैं
किसएहसास-ए-जुर्मकीसबकरतेहैंतवक़्क़ो'
इककिरदारकियाथाजिसमेंक़ातिलथामैं
कौनथावोजिसनेयेहालकियाहैमेरा
किसकोइतनीआसानीसेहासिलथामैं
सारीतवज्जोहदुश्मनपरमरकूज़थीमेरी
अपनीतरफ़सेतोबिल्कुलहीग़ाफ़िलथामैं
जिनपरमैंथोड़ासाभीआसानहुआहूँ
वहीबतासकतेहैंकितनामुश्किलथामैं
नींदनहींआतीथीसाज़िशकेधड़केमें
फ़ातेहहोकरभीकिसदर्जाबुज़दिलथामैं
घरमेंख़ुदकोक़ैदतोमैंनेआजकियाहै
तबभीतन्हाथाजबमहफ़िलमहफ़िलथामैं
  - Shariq Kaifi
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy