hone se mire farq hi padta tha bhala kya | होने से मिरे फ़र्क़ ही पड़ता था भला क्या

  - Shariq Kaifi
होनेसेमिरेफ़र्क़हीपड़ताथाभलाक्या
मैंआजजागातोसवेराहुआक्या
सबभीगीरुतेंनींदकेउसपारहैंशायद
लगतीहैज़राआँखतोआतीहैहवाक्या
हमखोजमेंजिसकीहैंपरेशानअज़लसे
बीमारकीआँखोंनेवोदरढूँडलियाक्या
मक़्तूलकोबाँहोंमेंलिएबैठारहूँक्यूँँ
इसजुर्मसेलेनाहैउसेऔरमज़ाकिया
दीवारक़फ़सकीहोकिघरकीमुझेक्याफ़र्क़
तफ़रीहकेसामाँहोंमुयस्सरतोसज़ाक्या
ऐसातोकभीरक़्समेंबे-ख़ुदहवामैं
मय-ख़ानेकेमाहौलमेंहोताहैनशाक्या
येधूपकीतेज़ीयेसराबोंकीसजावट
सहरानेजुनूँकोमिरेपहचानलियाक्या
  - Shariq Kaifi
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