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Shantanu Sharma
khoob jab badnaam ki cigarette maine
khoob jab badnaam ki cigarette maine | ख़ूब जब बदनाम की सिगरेट मैंने
- Shantanu Sharma
ख़ूब
जब
बदनाम
की
सिगरेट
मैंने
एक
तेरे
नाम
की
सिगरेट
मैंने
छोड़ते
हर
रोज़
फिर
हर
रोज़
पीते
लो
जला
ली
शाम
की
सिगरेट
मैंने
- Shantanu Sharma
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मुँह
पर
नक़ाब-ए-ज़र्द
हर
इक
ज़ुल्फ़
पर
गुलाल
होली
की
शाम
ही
तो
सहर
है
बसंत
की
Lala Madhav Ram Jauhar
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ज़ख़्म
है
दर्द
है
दवा
भी
है
जैसे
जंगल
है
रास्ता
भी
है
यूँँ
तो
वादे
हज़ार
करता
है
और
वो
शख़्स
भूलता
भी
है
हम
को
हर
सू
नज़र
भी
रखनी
है
और
तेरे
पास
बैठना
भी
है
यूँँ
भी
आता
नहीं
मुझे
रोना
और
मातम
की
इब्तिदा
भी
है
चूमने
हैं
पसंद
के
बादल
शाम
होते
ही
लौटना
भी
है
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Karan Sahar
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उजाले
अपनी
यादों
के
हमारे
साथ
रहने
दो
न
जाने
किस
गली
में
ज़िंदगी
की
शाम
हो
जाए
Bashir Badr
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बुलाया
शाम
को
लेकिन
वहाँ
मैं
सुब्ह
जा
बैठा
सुना
था
देर
से
आना
उसे
अच्छा
नहीं
लगता
Krishnakant Kabk
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अजब
अंदाज़
के
शाम-ओ-सहर
हैं
कोई
तस्वीर
हो
जैसे
अधूरी
Asad Bhopali
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ये
शाम
ख़ुशबू
पहन
के
तेरी
ढली
है
मुझ
में
जो
रेज़ा
रेज़ा
मैं
क़तरा
क़तरा
पिघल
रही
हूँ
ख़मोश
शब
के
समुंदरों
में
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Kiran K
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सुब्ह-ए-मग़रूर
को
वो
शाम
भी
कर
देता
है
शोहरतें
छीन
के
गुमनाम
भी
कर
देता
है
वक़्त
से
आँख
मिलाने
की
हिमाकत
न
करो
वक़्त
इंसान
को
नीलाम
भी
कर
देता
है
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Nadeem Farrukh
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तू
है
सूरज
तुझे
मालूम
कहाँ
रात
का
दुख
तू
किसी
रोज़
मेरे
घर
में
उतर
शाम
के
बाद
Farhat Abbas Shah
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शाम
भी
हो
गई
धुँदला
गई
आँखें
भी
मिरी
भूलने
वाले
मैं
कब
तक
तिरा
रस्ता
देखूँ
Parveen Shakir
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तू
नया
है
तो
दिखा
सुब्ह
नई
शाम
नई
वर्ना
इन
आँखों
ने
देखे
हैं
नए
साल
कई
Faiz Ludhianvi
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पहली
मुहब्बत
की
ख़ुशी
लाएँ
कहाँ
से
दोबारा
अब
तुम
जैसी
ही
लाएँ
कहाँ
से
तुम
तो
चलो
दुख
के
बहाने
साथ
भी
हो
और
फिर
हितैषी
भी
कोई
लाएँ
कहाँ
से
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Shantanu Sharma
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बड़ा
आसान
था
तेरे
लिए
कहना
रहो
तुम
साथ
या
फिर
दूर
मुझ
सेे
क्या
Shantanu Sharma
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सभी
यादें
भुला
दीं
यूँँही
मैंने
बुझी
आँखें
रुला
दीं
यूँँही
मैंने
बहुत
जागा
किया
मैं
एक
दिन
फिर
कई
रातें
सुला
दीं
यूँँही
मैंने
तेरी
हर
बात
सोची
समझी
चाही
सभी
बातें
भुला
दीं
यूँँही
मैंने
ग़ज़ल
के
इस
कठिन
झूले
में
यारो
बहुत
यादें
झुला
दीं
यूँँही
मैंने
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Shantanu Sharma
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वो
जो
मुझको
भा
रहा
है
कौन
है
वो
ख़्वाबों
में
जो
आ
रहा
है
कौन
है
वो
शक्ल
उसकी
मेज़
पर
गढ़ने
लगा
हूँ
दिल
को
जो
तड़पा
रहा
है
कौन
है
वो
जिसकी
ख़ातिर
बदला
है
तू
मैं
ही
तो
हूँ
मुझको
जो
बहला
रहा
है
कौन
है
वो
क्या
करेगा
शांतनु
इस
दुनिया
का
अब
जिसको
पर
अपना
रहा
है
कौन
है
वो
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Shantanu Sharma
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थी
ख़्वाहिशें
तुझ
से
बहुत
सारी
मुझे
थी
ज़िंदगी
तू
कुछ
बहुत
प्यारी
मुझे
Shantanu Sharma
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