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Shantanu Sharma
duniya kii aabaa
duniya kii aabaa | दुनिया की आबादी में काफ़ी अकेले रह गए हम
- Shantanu Sharma
दुनिया
की
आबादी
में
काफ़ी
अकेले
रह
गए
हम
इक
तुम्हारे
साथ
थे
फिर
भी
अकेले
रह
गए
हम
- Shantanu Sharma
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ख़ून
से
जोड़ा
हुआ
हर
ईंट
ढेला
हो
गया
दो
तरफ़
चूल्हे
जले
औ'
घर
अकेला
हो
गया
Dhiraj Singh 'Tahammul'
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बड़ी
मुश्किल
से
नीचे
बैठते
हैं
जो
तेरे
साथ
उठते-बैठते
हैं
अकेले
बैठना
होगा
किसी
को
अगर
हम
तुम
इकट्ठे
बैठते
हैं
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Khurram Afaq
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एक
अकेले
की
ख़ातिर
जब
दो
कप
कॉफी
में
चीनी
आज
मिलाते
हैं
तो
रो
देते
हैं
हम
Atul K Rai
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तुम
अपने
बारे
में
कुछ
देर
सोचना
छोड़ो
तो
मैं
बताऊँ
कि
तुम
किस
क़दर
अकेले
हो
Waseem Barelvi
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एक
महफ़िल
में
कई
महफ़िलें
होती
हैं
शरीक
जिस
को
भी
पास
से
देखोगे
अकेला
होगा
Nida Fazli
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उम्र
शायद
न
करे
आज
वफ़ा
काटना
है
शब-ए-तन्हाई
का
Altaf Hussain Hali
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नाप
रहा
था
एक
उदासी
की
गहराई
हाथ
पकड़कर
वापस
लायी
है
तन्हाई
वस्ल
दिनों
को
काफ़ी
छोटा
कर
देता
है
हिज्र
बढ़ा
देता
है
रातों
की
लम्बाई
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Tanoj Dadhich
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यदि
अंधकार
से
लड़ने
का
संकल्प
कोई
कर
लेता
है
तो
एक
अकेला
जुगनू
भी
सब
अन्धकार
हर
लेता
है
Balkavi Bairagi
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हम
कुछ
ऐसे
उसके
आगे
अपनी
वफ़ा
रख
देते
हैं
बच्चे
जैसे
रेल
की
पटरी
पर
सिक्का
रख
देते
हैं
तस्वीर-ए-ग़म,
दिल
के
आँसू,
रंजो-नदामत,
तन्हाई
उसको
ख़त
लिखते
हैं
ख़त
में
हम
क्या
क्या
रख
देते
हैं
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Subhan Asad
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मैं
अपने
चारों
तरफ़
हूँ
और
इस
तरह
का
हुजूम
अजीब
किस्म
की
तन्हाई
साथ
लाता
है
Abhishek shukla
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सभी
यादें
भुला
दीं
यूँँही
मैंने
बुझी
आँखें
रुला
दीं
यूँँही
मैंने
बहुत
जागा
किया
मैं
एक
दिन
फिर
कई
रातें
सुला
दीं
यूँँही
मैंने
तेरी
हर
बात
सोची
समझी
चाही
सभी
बातें
भुला
दीं
यूँँही
मैंने
ग़ज़ल
के
इस
कठिन
झूले
में
यारो
बहुत
यादें
झुला
दीं
यूँँही
मैंने
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Shantanu Sharma
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ख़ूब
जब
बदनाम
की
सिगरेट
मैंने
एक
तेरे
नाम
की
सिगरेट
मैंने
छोड़ते
हर
रोज़
फिर
हर
रोज़
पीते
लो
जला
ली
शाम
की
सिगरेट
मैंने
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Shantanu Sharma
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धुआँ
सिगरेट
का
थोड़ा
बहुत
पलता
रहा
मुझ
में
कई
दिन
रात
उसका
ख़्वाब
बस
जलता
रहा
मुझ
में
गया
वो
बाँध
कर
अपनी
सभी
यादें
मगर
फिर
भी
कई
मुद्दत
वही
चेहरा
कहीं
चलता
रहा
मुझ
में
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Shantanu Sharma
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घर
की
सब
जिम्मेदारी
उस
के
ही
काँधे
पर
हैं
फिर
भी
उस
की
आँखों
में
दो
ही
चहरे
रहते
हैं
Shantanu Sharma
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मेरी
चाहत
मेरा
मान
नहीं
रखती
अब
ये
क़िस्मत
मेरा
ध्यान
नहीं
रखती
यूँँ
तो
रखती
है
सब
से
मेरी
यारी
पर
अब
सब
के
आगे
जान
नहीं
रखती
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Shantanu Sharma
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