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Shan Sharma
ik KHushi hi nahin thehar paai
ik KHushi hi nahin thehar paai | इक ख़ुशी ही नहीं ठहर पाई
- Shan Sharma
इक
ख़ुशी
ही
नहीं
ठहर
पाई
बे-क़रारी
जहाँ-तहाँ
ठहरी
- Shan Sharma
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बाक़ी
नहीं
रहा
है
कोई
रब्त
शहरस
यानी
कि
ख़ुश
रहेंगे
यहाँ
ख़ुश
रहे
बग़ैर
pankaj pundir
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ज़िक्र
तबस्सुम
का
आते
ही
लगते
हैं
इतराने
लोग
और
ज़रा
सी
ठेस
लगी
तो
जा
पहुँचे
मयख़ाने
लोग
Ateeq Allahabadi
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ख़ुशी
की
बात
और
है
ग़मों
की
बात
और
तुम्हारी
बात
और
है
हमारी
बात
और
Anwar Taban
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जाने
कैसे
ख़ुश
रहने
की
आदत
डाली
जाती
है
उनके
यहाँ
तो
बारिश
में
भी
धूप
निकाली
जाती
है
Ritesh Rajwada
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वो
रातें
चाँद
के
साथ
गईं
वो
बातें
चाँद
के
साथ
गईं
अब
सुख
के
सपने
क्या
देखें
जब
दुख
का
सूरज
सर
पर
हो
Ibn E Insha
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मुद्दत
के
बाद
उस
ने
जो
की
लुत्फ़
की
निगाह
जी
ख़ुश
तो
हो
गया
मगर
आँसू
निकल
पड़े
Kaifi Azmi
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मुद्दत
के
बाद
ख़्वाब
में
आया
था
मेरा
बाप
और
उसने
मुझ
सेे
इतना
कहा
ख़ुश
रहा
करो
Abbas Tabish
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हल्की-हल्की
सी
हँसी,
साफ
इशारा
भी
नहीं
जान
भी
ले
गए
और,
जान
से
मारा
भी
नहीं
Sawan Shukla
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हाँ
यही
मेरी
ख़ुद-शनासी
है
जिस्म
ताज़ा
है
रूह
बासी
है
सब
हँसी
को
हँसी
समझते
हैं
तुम
तो
समझो
हँसी
उदासी
है
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Armaan khan
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ये
ख़ुश
आँखें
किसी
दिन
रो
पड़ेंगी
और
किसी
दिन
मुस्कुराएंगी
उदास
आँखें
Siddharth Saaz
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कभी
अच्छा
कभी
ज़ालिम
हज़ारों
जिसकी
शक़्लें
भला
फ़ितरत
बयाँ
उसकी
मुसव्विर
क्या
करेंगे
Shan Sharma
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मिरा
दिल
काम
करता
है
सभी
वैसे
सलीक़े
के
यक़ीं
करने
का
लेकिन
काम
ये
बेकार
करता
है
Shan Sharma
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क्या
मिली
कुछ
इलाजकारी
है
जौन
मुझको
भी
बेक़रारी
है
तुम
तो
पहले
गुज़ार
बैठे
थे
ग़म
की
शब
मैंने
क्यूँ
गुज़ारी
है
ऐन
फिर
शीन
काफ़
के
जुमले
इश्क़
बदहाल
लत
हमारी
है
दौर
है
ये
हसीन
सूरत
का
ज़ख़्म
की
दिल
पे
दाग़दारी
है
मुस्कुराहट
लबों
पे
तारी
है
हाँ
मगर
वो
भी
झूठ
सारी
है
मैं
वो
बदज़ात
हूँ
कि
अब
जिसको
ख़ुल्द
की
धूल
ना-गवारी
है
चाँद
की
चाहतें
बसर
कर
के
आँख
लगती
चकोर
भारी
है
'शान'
टुकड़ों
में
जोड़
के
जी
लो
ज़िंदगी
साँस
की
सवारी
है
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Shan Sharma
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किताबें
शौक़
से
पढ़ने
लगी
तुम
मैं
भी
थोड़ा
बहुत
लिखने
लगा
हूँ
Shan Sharma
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ज़ख़्म
तुझको
नवाज़
दूँ
भी
गर
पर
न
धोखा
मैं
दिलरुबा
दूँगा
Shan Sharma
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