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Shamsul Hasan ShamS
kaleja kheenchti hai yaad uski
kaleja kheenchti hai yaad uski | कलेजा खींचती है याद उसकी
- Shamsul Hasan ShamS
कलेजा
खींचती
है
याद
उसकी
वो
इक
चेहरा
बहुत
याद
आ
रहा
है
तुम्हारे
हिज्र
का
ग़म
इन
दिनों
में
मेरे
चहरे
की
रौनक़
खा
रहा
है
- Shamsul Hasan ShamS
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जौन
तुम्हें
ये
दौर
मुबारक,
दूर
ग़म-ए-अय्याम
से
हो
एक
पागल
लड़की
को
भुला
कर
अब
तो
बड़े
आराम
से
हो
Jaun Elia
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दर्द
मिन्नत-कश-ए-दवा
न
हुआ
मैं
न
अच्छा
हुआ
बुरा
न
हुआ
Mirza Ghalib
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खुशियाँ
उसी
के
साथ
हैं
जो
ग़म
गुसार
है
ऐसे
हरेक
शख़्स
ही
दुनिया
का
यार
है
Sunny Seher
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हम
अपने
दुख
को
गाने
लग
गए
हैं
मगर
इस
में
ज़माने
लग
गए
हैं
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Madan Mohan Danish
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भला
तुम
कैसे
जानोगे
मिला
है
दर्द
जो
गहरा
वो
जैसे
नोचता
है
बाल
अपने
नोच
कर
देखो
Kushal "PARINDA"
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वो
रातें
चाँद
के
साथ
गईं
वो
बातें
चाँद
के
साथ
गईं
अब
सुख
के
सपने
क्या
देखें
जब
दुख
का
सूरज
सर
पर
हो
Ibn E Insha
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ऐ
ग़म-ए-ज़िंदगी
न
हो
नाराज़
मुझ
को
आदत
है
मुस्कुराने
की
Abdul Hamid Adam
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यतीमों
की
तरह
बस
पाल
रक्खा
है
इन्हें
हमने
हमें
जो
दुख
मिले
हैं
वो
हमारे
दुख
नहीं
लगते
किसी
की
आँख
में
रहकर
किसी
के
ख़्वाब
देखे
हैं
हजारों
कोशिशें
की
पर
किनारे
दुख
नहीं
लगते
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Rohit Gustakh
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ये
किस
मक़ाम
पे
लाई
है
ज़िंदगी
हम
को
हँसी
लबों
पे
है
सीने
में
ग़म
का
दफ़्तर
है
Hafeez Banarasi
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उदासी
का
सबब
दो
चार
ग़म
होते
तो
कह
देता
फ़ुलाँ
को
भूल
बैठा
हूँ
फ़ुलाँ
की
याद
आती
है
Ashu Mishra
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पहले
इक
तरक़ीब
निकाली
जाती
है
फिर
उसकी
तस्वीर
बना
ली
जाती
है
धीरे
धीरे
बचपन
ढलता
जाता
है
और
ख़ुद
से
उम्मीद
लगा
ली
जाती
है
दिन
की
सूरत
चाँद
सितारे
तकते
हैं
और
सूरज
से
रात
निकाली
जाती
है
पहले
हमको
गिफ़्ट
दिए
जाते
हैं
फिर
हम
सेे
वो
ही
चीज़
चुरा
ली
जाती
है
पहली
सूरत
इनकारी
की
सूरत
में
इश्क़
से
अपनी
जान
बचा
ली
जाती
है
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Shamsul Hasan ShamS
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दुखा
था
दिल
मेरा
टूटा
नहीं
था
मगर
उस
सेे
कभी
शिकवा
नहीं
था
बहुत
नुक़्सान
में
हैं
इश्क़
करके
हमारा
इस्तिफ़ादा
था
नहीं
था
हवस
बाज़ार
होती
जा
रही
थी
कोई
चेहरा
पस-ए-पर्दा
नहीं
था
कई
मजबूरियाँ
थीं
उन्स
में
और
शरीक-ए-गिर्या-ए-धोका
नहीं
था
करेंगे
इस्तिख़ारा
वो
किसी
दिन
उन्हें
मुझ
पे
भरोसा
था
नहीं
था
मुशाहिद
कब
हमारी
होगी
पेशी
हमें
इस
दुख
का
अंदाज़ा
नहीं
था
हमें
फिर
ख़ुद-कुशी
करनी
पड़ी
थी
कि
इसके
बाद
फिर
रस्ता
नहीं
था
बहुत
ऊपर
से
दिख
जाता
था
सबको
मगर
ये
ज़ख़्म
बस
दुखता
नहीं
था
तुम्हारे
इश्क़
का
सारा
असर
है
ये
लड़का
इस
क़दर
सादा
नहीं
था
मेरी
बीनाई
खोती
जा
रही
थी
तू
जब
तक
पास
से
गुज़रा
नहीं
था
ज़रा
औक़ात
से
बाहर
तो
आओ
हमारा
दोस्त
तुम
जैसा
नहीं
था
मेरी
मानो
कि
काँटा
उस
गली
का
ज़रा
भी
पाँव
में
चुभता
नहीं
था
दिलासे
ग़म
कमी
तकलीफ़
धोका
हमारे
पास
में
क्या
क्या
नहीं
था
नहीं
चलती
थी
फिर
ये
नब्ज़
मेरी
कभी
जो
उसको
मैं
छूता
नहीं
था
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Shamsul Hasan ShamS
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हम
अपने
आप
मर
जाएँगे
इक
दिन
तुम्हारा
छोड़ना
ज़ाया'
रहेगा
Shamsul Hasan ShamS
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मेरी
आँखों
ने
भी
वहशत
का
सबब
जान
लिया
किसी
के
दुख
पे
तुम्हें
रोते
हुए
देखता
था
Shamsul Hasan ShamS
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कोई
कबूतर
तुम्हारे
ख़त
को
कुतर
रहा
है
ये
हिज्र
हमपे
जवाल
बन
के
उतर
रहा
है
मिली
है
किसको
हमारे
हिस्से
की
ये
मोहब्बत
है
कौन
वो
जो
तुम्हारी
ख़ातिर
सुधर
रहा
है
वो
एक
लड़की
हमारी
बाहों
में
सो
रही
है
ये
वक़्त
पिछले
दिनों
से
अच्छा
गुज़र
रहा
है
वो
ऊँचे
लहजे
में
कर
रही
है
सभी
से
बातें
किसी
का
ग़ुस्सा
किसी
के
सर
पे
उतर
रहा
है
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Shamsul Hasan ShamS
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