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shampa andaliib
tum chale ho jahaan ko samjhaane
tum chale ho jahaan ko samjhaane | तुम चले हो जहाँ को समझाने
- shampa andaliib
तुम
चले
हो
जहाँ
को
समझाने
तुम
से
चालाक
है
बहुत
दुनिया
- shampa andaliib
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तुम
आसमान
पे
जाना
तो
चाँद
से
कहना
जहाँ
पे
हम
हैं
वहाँ
चांदनी
बहुत
कम
है
Shakeel Azmi
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हम
मेहनतकश
इस
दुनिया
से
जब
अपना
हिस्सा
माँगेंगे
इक
बाग़
नहीं,
इक
खेत
नहीं,
हम
सारी
दुनिया
माँगेंगे
Faiz Ahmad Faiz
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अपना
सब
कुछ
हार
के
लौट
आए
हो
न
मेरे
पास
मैं
तुम्हें
कहता
भी
रहता
था
कि
दुनिया
तेज़
है
Tehzeeb Hafi
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ये
कब
कहती
हूँ
तुम
मेरे
गले
का
हार
हो
जाओ
वहीं
से
लौट
जाना
तुम
जहाँ
बेज़ार
हो
जाओ
Parveen Shakir
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जहाँ
जो
था
वहीं
रहना
था
उस
को
मगर
ये
लोग
हिजरत
कर
रहे
हैं
Liaqat Jafri
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जब
आ
जाती
है
दुनिया
घूम
फिर
कर
अपने
मरकज़
पर
तो
वापस
लौट
कर
गुज़रे
ज़माने
क्यूँँ
नहीं
आते
Ibrat Machlishahri
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हम
क्या
करें
अगर
न
तिरी
आरज़ू
करें
दुनिया
में
और
भी
कोई
तेरे
सिवा
है
क्या
Hasrat Mohani
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टक
गोर-ए-ग़रीबाँ
की
कर
सैर
कि
दुनिया
में
उन
ज़ुल्म-रसीदों
पर
क्या
क्या
न
हुआ
होगा
Meer Taqi Meer
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तुम्हारे
साथ
था
तो
मैं
गम-ए-उल्फ़त
में
उलझा
था
तुम्हें
छोड़ा
तो
ये
जाना
कि
दुनिया
ख़ूब-सूरत
है
Nirbhay Nishchhal
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बना
कर
हमने
दुनिया
को
जहन्नुम
ख़ुदा
का
काम
आसाँ
कर
दिया
है
Rajesh Reddy
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तेरी
मुस्कान
मेरे
ज़ख़्मों
पर
रोज़
मरहम
का
काम
करती
है
shampa andaliib
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ज़िंदा
रखती
है
जिस
की
परछाई
एक
ऐसा
दरख़्त
है
माई
कैसे
उस
घर
में
ख़ुश
रहे
माई
भाई
से
लड़
रहा
जहाँ
भाई
बाद
मुद्दत
के
भर
रहे
हैं
ज़ख़्म
उम्र
गुज़री
तो
छट
रही
काई
रहनुमा
हो
गए
कहाँ
ओझल
मेरी
राहों
में
खोद
कर
खाई
तू
नहीं
है
ये
अब
हुआ
एहसास
मैं
अचानक
से
इस
तरफ़
आई
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shampa andaliib
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हमारी
आँखों
का
काजल
बहा
कर
जो
आया
वो
गया
दिल
को
दुखा
कर
हमारी
कौन
सुनता
चल
दिए
सब
हमें
तकलीफ़
फिर
अपनी
सुना
कर
वो
पंछी
फिर
दोबारा
उड़
न
पाए
किए
आज़ाद
जो
क़ैदी
बना
कर
ख़ुशी
बाँटो
ख़ुशी
से
और
सोचो
किसी
को
क्या
मिला
है
दिल
दुखा
कर
अगर
मुजरिम
हो
तो
फिर
जुर्म
अपना
करो
मंज़ूर
अब
सर
को
झुका
कर
हमारी
आँखें
तो
तकती
रहीं
पर
नहीं
देखा
किसी
ने
दूर
जा
कर
चलो
भरते
हैं
ख़ालीपन
ये
शम्पा
दर-ओ-दीवार
को
बातें
सुना
कर
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shampa andaliib
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समझदारी
का
होता
है
कभी
ये
काम
मेरे
दोस्त
क़दम
पीछे
हटाने
से
कोई
बुज़दिल
नहीं
होता
shampa andaliib
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मुझे
उड़ने
का
मोक़ा
तब
मिला
था
मेरे
सय्याद
ने
जब
पर
जलाए
shampa andaliib
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