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shampa andaliib
ta-umr mere sar pe raha gham ka aaftaab
ta-umr mere sar pe raha gham ka aaftaab | ता-उम्र मेरे सर पे रहा ग़म का आफ़्ताब
- shampa andaliib
ता-उम्र
मेरे
सर
पे
रहा
ग़म
का
आफ़्ताब
लेकिन
कभी
हयात
ने
रुस्वा
नहीं
किया
- shampa andaliib
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लाखों
सद
में
ढेरों
ग़म
फिर
भी
नहीं
हैं
आँखें
नम
इक
मुद्दत
से
रोए
नहीं
क्या
पत्थर
के
हो
गए
हम
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Azm Shakri
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हाए
उसके
हाथ
पीले
होने
का
ग़म
इतना
रोए
हैं
कि
आँखें
लाल
कर
ली
Harsh saxena
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तेरा
बुत
तो
नहीं
था
पास
मेरे,
तेरी
यादों
को
अपने
पास
रखा
गोया
हस्ते
हुए
भी
हमने
सदा,
अपने
दिल
को
बहुत
उदास
रखा
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Prince
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अपने
क़ातिल
की
ज़ेहानत
से
परेशान
हूँ
मैं
रोज़
इक
मौत
नए
तर्ज़
की
ईजाद
करे
Parveen Shakir
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हुआ
जौन
को
पढ़
के
मालूम
ये
उदासी
का
भी
इक
कलर
होता
है
Viru Panwar
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जीना
मुश्किल
है
के
आसान,
ज़रा
देख
तो
लो
लोग
लगते
हैं
परेशान,
ज़रा
देख
तो
लो
इन
चराग़ों
के
तले
ऐसे
अँधेरे
क्यूँँ
हैं?
तुम
भी
रह
जाओगे
हैरान,
ज़रा
देख
तो
लो
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Javed Akhtar
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मुझे
ये
डर
है
तेरी
आरज़ू
न
मिट
जाए
बहुत
दिनों
से
तबीअत
मिरी
उदास
नहीं
Nasir Kazmi
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दूजों
का
दुख
समझने
को
बे
हद
ज़रूरी
है
थोड़ी
सही
प
दिल
में
अज़ीयत
बनी
रहे
Afzal Ali Afzal
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किसी
किसी
को
नसीब
हैं
ये
उदासियाँ
भी
किसी
को
ये
भी
बता
न
पाए
उदास
लड़के
Vikas Sahaj
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यही
बहुत
है
मिरे
ग़म
में
तुम
शरीक
हुए
मैं
हॅंस
पड़ूँगा
अगर
तुमने
अब
दिलासा
दिया
Imran Aami
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गर
ज़ियादा
नहीं
तो
थोड़ी
हो
बात
कुछ
देर
हो
पर
अच्छी
हो
एक
कमरा
हो
कुछ
किताबें
हों
और
खिड़की
से
धूप
आती
हो
क्या
ज़रूरत
पड़े
किसी
की
अगर
दोस्त
में
बात
दोस्त
जैसी
हो
ऐसी
ख़्वाहिश
पनप
गई
दिल
में
उम्र
कट
जाए
जो
न
पूरी
हो
जाने
किस
कैफ़ियत
में
होगा
वो
जिस
को
हर
एक
बात
चुभती
हो
ऐसे
लोगों
से
बात
क्या
की
जाए
जिन
की
हर
एक
बात
झूठी
हो
जाने
वाले
चले
गए
शम्पा
आप
किस
कैफ़ियत
में
बैठी
हो
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shampa andaliib
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हमारा
दिल
तो
खंडर
बन
चुका
है
यहाँ
सब
टूट
कर
बिखरा
पड़ा
है
मिरी
आँखों
में
अब
तक
ताज़गी
है
कोई
चेहरा
मिरे
दिल
में
बसा
है
न
जाने
क्यूँँ
उधर
हम
चल
रहे
हैं
अमूमन
जिस
तरफ़
जाना
मना
है
जहाँ
तक
चल
सको
चलते
रहो
बस
मोहब्बत
एक
लम्बा
रास्ता
है
अभी
और
रौशनी
करनी
पड़ेगी
अभी
हम
को
बहुत
कुछ
देखना
है
भँवर
की
सम्त
कश्ती
जा
रही
है
मगर
बे-फ़िक्र
फिर
भी
ना-ख़ुदा
है
अभी
तक
डॉक्टर
आया
नहीं
और
मरज़
दिन-रात
बढ़ता
जा
रहा
है
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shampa andaliib
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जहाँ
भर
का
अँधेरा
आज
देखो
मिरे
दिल
में
समाता
जा
रहा
है
shampa andaliib
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उसी
सूरज
की
मुझ
पर
रौशनी
है
जिसे
कल
साथ
में
देखा
था
हम
ने
shampa andaliib
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हैरत-ज़दा
हूँ
बारहा
ज़ख़्मों
को
देख
कर
शायद
न
भूल
पाऊँ
दिसम्बर
को
उम्र
भर
shampa andaliib
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