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shampa andaliib
mere dil men bhi ghar kar gayi khaamoshi
mere dil men bhi ghar kar gayi khaamoshi | मेरे दिल में भी घर कर गई ख़ामोशी
- shampa andaliib
मेरे
दिल
में
भी
घर
कर
गई
ख़ामोशी
उसने
भी
कुछ
यार
तवज्जोह
कम
कर
दी
- shampa andaliib
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गुमान
है
या
किसी
विश्वास
में
है
सभी
अच्छे
दिनों
की
आस
में
है
ये
कैसा
जश्न
है
घर
वापसी
का
अभी
तो
राम
ही
वनवास
में
है
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Azhar Iqbal
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हमारे
घर
के
रिश्तों
में
अभी
बारीकियाँ
कम
हैं
भतीजा
मार
खाता
है
तो
चाचा
बोल
देते
हैं
Nirbhay Nishchhal
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अब
के
सावन
में
शरारत
ये
मिरे
साथ
हुई
मेरा
घर
छोड़
के
कुल
शहर
में
बरसात
हुई
Gopaldas Neeraj
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हर
इक
सू
हैं
दर-ओ-दीवार
लेकिन
मुयस्सर
है
नहीं
घर-बार
लेकिन
Umrez Ali Haider
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इसी
उम्मीद
से
मैं
देखता
हूँ
रास्ता
उसका
वो
आएगा
ज़मी
बंजर
में
इक
दिन
घर
उगाने
को
Kushal "PARINDA"
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उस
को
रुख़्सत
तो
किया
था
मुझे
मालूम
न
था
सारा
घर
ले
गया
घर
छोड़
के
जाने
वाला
Nida Fazli
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लोग
कहते
हैं
कि
इस
खेल
में
सर
जाते
हैं
इश्क़
में
इतना
ख़सारा
है
तो
घर
जाते
हैं
Shakeel Jamali
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तेरी
यादें
लिपट
जाती
हैं
मुझ
से
घर
पहुँचते
ही
कि
जैसे
बाप
से
आकर
कोई
बच्ची
लिपटती
है
Afzal Ali Afzal
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घर
की
इस
बार
मुकम्मल
मैं
तलाशी
लूँगा
ग़म
छुपा
कर
मिरे
माँ
बाप
कहाँ
रखते
थे
Unknown
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हसीन
यादों
के
चाँद
को
अलविदा'अ
कह
कर
मैं
अपने
घर
के
अँधेरे
कमरों
में
लौट
आया
Hasan Abbasi
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किसी
से
अब
कोई
शिकवा
नहीं
है
हमारा
वक़्त
ही
अच्छा
नहीं
है
फ़लक
पर
धुंध
ही
है
या
हमीं
ने
अभी
तक
ग़ौर
से
देखा
नहीं
है
हमारी
ज़िंदगी
रफ़्तार
में
है
हमारे
पास
कुछ
रुकता
नहीं
है
ये
सूनी
खिड़कियाँ
अब
बोलती
हैं
कोई
परदेस
से
लौटा
नहीं
है
कई
सदमों
से
वाक़िफ़
हो
चुका
है
ग़नीमत
है
कि
दिल
बैठा
नहीं
है
ख़ुशी
की
बात
है
ख़ुश
हैं
हमारे
ख़ुशी
की
बात
पर
रोना
नहीं
है
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shampa andaliib
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वो
अब
हम
सेे
दूरी
बनाने
लगे
हैं
रक़ीबों
की
महफ़िल
सजाने
लगे
हैं
ये
शिकवे
शिकायत
करें
भी
तो
किस
से
सितम
मेहरबाँ
हम
पे
ढाने
लगे
हैं
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shampa andaliib
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अपनी
आँखों
में
देखने
दे
मुझे
मेरी
आँखों
को
चैन
पड़
जाए
shampa andaliib
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हम
को
दोषी
ठहराते
हैं
ख़ुद
ही
लोग
बदल
जाते
हैं
अपनों
की
बातें
सुन
कर
हम
अब
मन
ही
मन
घबराते
हैं
उन
को
कोई
दुख
नइँ
होता
जो
अपना
रोना
गाते
हैं
रोज़
दु'आ
में
रब
से
बोलूँ
जाने
वाले
कब
आते
हैं
छोड़
के
दुनिया-दारी
मुझ
को
अब
चंदा
तारे
भाते
हैं
पागल
क़ासिद
लौटा
कर
अब
मेरी
चिट्ठी
ले
आते
हैं
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shampa andaliib
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किरदार
के
हिसाब
से
चलती
रहूँगी
मैं
लाज़िम
है
मुझ
को
राह
में
कुछ
मुश्किलें
मिलें
shampa andaliib
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